नई दिल्ली। भारत सरकार के ऐतराज के बावजूद आज कश्मीर के अलगाववादी नेताओं से मुलाकात कर पाकिस्तान हाई कमिश्नर अब्दुल बासित के द्वारा देश के अंदरूनी मामलो में दखल देना बंद नहीं किया देखना हे की सरकार इस पर क्या सख्त रूख इस्तेमाल करती हे या भारत भूमि पर आतंकवादियों को खुलकर समर्थन दे रहे पाकिस्तान हाई कमिश्नर की देशद्रोही हरकतों को पूर्व सरकारों की तरह ही नजरअंदाज करती रहती हे ।
भारत की तरफ से सचिव स्तर की बातचीत रद्द कर देने के बावजूद पाकिस्तानी रवैये में कोई बदलाव नहीं हुआ। आज अलगाववादी नेता दिल्ली आए और इस मुलाकात के विरोध में प्रदर्शनों का दौर चलता रहा।
विरोध प्रदर्शन के बीच कश्मीर के अलगाववादी नेता सैय्यद अली शाह गिलानी पाकिस्तान के उच्चायुक्त से मिलने पाकिस्तानी उच्चायोग पहुंचे। भारत के कड़े रुख के बावजूद पाकिस्तान अपना रवैया बदलने को तैयार नहीं। विदेश सचिव स्तर की बातचीत रोके जाने के बाद भी कश्मीरी अलगाववादियों से मुलाकातों का दौर जारी है। गिलानी भी पाकिस्तान की धुन पर गाते नाचते नजर आए। उन्होंने सचिव स्तर की बातचीत बंद करने को गलत ठहराया।
सरकार ने अलगाववादियों से पाकिस्तानी उच्चायुक्त की इस मुलाकात को देश के अंदरुनी मामलों में दखल करार दिया है। इसी वजह से 25 अगस्त को होने जा रही विदेश सचिव स्तर की बातचीत रद्द की गई। अब विपक्ष सरकार की नीति पर सवाल खड़े कर रहा है। कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि पाकिस्तान के साथ भारत सरकार की नीति स्पष्ट नहीं है। सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए कि वो किस मुद्दों, वायदों पर पाकिस्तान के साथ बातचीत के लिए राजी हुए थे। हमें खुशी होगी अगर सरकार और विपक्ष को भरोसे में ले।
उधर बीजेपी नेताओं का कहना है कि पाकिस्तान भारत से अच्छे रिश्ते चाहता ही नहीं इसलिए अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा। ऐसे में बातचीत बंद करनी ही चाहिए। उधर जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा और सरहद पर तनाव अब भी बरकरार है। हालांकि सरकार के सख्त रवैये के बाद ताजा फायरिंग की कोई खबर नहीं आई है, लेकिन गांवों में दहशत अब भी बरकरार है।






















