नईदिल्ली. मोदी सरकार की दो टूक के बाद अब भाजपा ने भी स्पस्ट कर दिया की पाकिस्तान या तो भारत के साथ बात कर ले या फिर अलगाववादियों के साथ, और इसी के साथ यह भी तय हो गया की संघ के संरक्षण वाली भाजपा सरकार के नेता मोदी कश्मीर मामले में अत्यंत सख्त रूख रख रहे हे और लगता हे कि देश के हितो से कोई समझोता नहीं करेंगे , अब तक भारत के कट्टर राष्ट्रवादियो को मलाल था की मोदी अन्य एनडीए यूपीए पीएम की तरह ही पाकिस्तान से दोस्ती का हाथ बड़ा कर, वही कर रहे हे जिसकी संघ और वो ही लगातार आलोचना किया करते थे , सरकार ने मास्टर स्ट्रोक चलकर पाक दूतावास के अलगाववादियों से मना करने के बाद भी बात करने और लगातार सीज फाएर उल्लंघन को मुद्दा बनाकर अहम् सचिव स्तर वार्ता रद्द कर अपनी गलती सुधार ली.
विपक्ष का कहना हे की जब माँहोल अनुकूल नहीं थे तो वार्ता शुरू ही नहीं करना था. अलगाववादी पक्षों के हाथो के तोते उड़ गए उनकी सिट्टी पिट्टी गुम हो गयी उनको मोदी से सपने में भी ऐसे कारनामे की उम्मीद नहीं थी उन्हें लगता था वाजपेयी अडवानी की ही तरह मोदी दोस्ती का राग अलापेगे और तुट्पुन्जीये अलगाववादियों की दूकानदारी चलती रहेगी. अब अलगाववादियों के समर्थक मोदी की निंदा कर रहे हे की यह संघ के दबाब के चलते लिया गया गलत कदम हे जिसमें ठन्डे पड़े कश्मीर मामले को मोदी ने अनावश्यक सारी दुनिया के सामने उघाड़ कर देश का ही नुकसान किया और अलग थलग पड़े पाक और उसके पिठ्ठू अलगाववादियों को ही बल दे दिया.
लेकिन सरकार के फेसले से इत्तफाक रखने वाले पूर्व सेना अफसर और विदेश मामलो के जानकार इसे सही कदम बताते हे और आने वाली सभी चुनोतियो से निपटने में देश को सक्षम मानते हे, वे कहते हे कि कानूनी रूप से कश्मीर भारत का अभिन्न अंग हे और शिमला समझोता के बाद यह मामला यदि कोई हे भी तो भारत और पाक का आपसी द्वीपक्षीय मामला रहेगा यह स्पस्ट तय हे, और संयुक्त राष्ट्र की इसमें कोई भी भूमिका नहीं हे.
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि भारत के साथ बातचीत के पहले कश्मीर के अलगाववादी संगठनों से पाकिस्तान का वार्ता करना कोई नयी बात नहीं है। लेकिन इस बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने साफ कह दिया है कि पाकिस्तान या तो भारत के साथ बात कर ले या फिर अलगाववादियों के साथ। शाह ने यहां भाजपा के प्रदेश कार्यकर्ताओं के एक सम्मेलन में कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच 25 अगस्त को विदेश सचिव स्तर की वार्ता होने जा रही थी। हमें गौरव है कि सरकार ने तत्काल फैसला किया कि पाकिस्तान की बातचीत या तो भारत के साथ हो सकती है या फिर अलगाववादियों के साथ।
प्रधानमंत्री मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तान सहित दक्षेस देशों के राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रित किये जाने का उल्लेख करते हुए शाह ने कहा, हम सबको साथ लेकर चलना चाहते हैं लेकिन भारत के हित और सम्मान की बलि देकर नहीं। ये संदेश दुनिया भर में फैल गया है। शाह ने कहा कि हम डब्ल्यूटीओ की सैद्धांतिक भूमिका को तो स्वीकार करते हैं लेकिन कोई ऐसा समझौता नहीं करेंगे, जिससे किसान का अहित हो।























