आर्य समाज के संस्थापक राष्ट्र देश विश्व के अप्रतिम महान संत दार्शनिक विचारक सुधारक शिक्षक चिंतक ऋषि दयानंद सरस्वती जी की पुण्य तिथि पर शत शत नमन,
महर्षि दयानन्द सरस्वती (१८२४-१८८३) आधुनिक भारत के महानतम चिन्तको में प्रमुख थे
उनके बचपन का नाम ‘मूलशंकर’ था। ‘वेदों की ओर लौटो’ यह उनका ही दिया हुआ प्रमुख नारा था । उन्होंने कर्म सिद्धान्त, पुनर्जन्म तथा सन्यास को अपने दर्शन के स्तम्भ बनाये।
उन्होंने ईश्वर को किसी एक जगह नहीं बल्कि सर्वव्यापी बताया,
उन्होंने ही राष्ट्र को स्वाधीनता के लिए भी प्रभावी तौर पर जागरूक किया,
उन्होंने ही सबसे पहले १८७६ में ‘स्वराज्य’ का नारा दिया।बाद में लोकमान्य तिलक तथा अन्य स्वतंत्रता सेनानियों ने इसे आगे बढ़ाया।
यह भी उल्लेखनीय है कि अधिकतर प्रमुख स्वातंत्र्य विचारक प्रेरक सेनानी आर्य समाज से रहे हैं, जिन्होंने बलिदान भी दिया,
प्रथम जनगणना के समय स्वामी जी ने आगरा से देश के सभी आर्यसमाजों को यह निर्देश भिजवाया कि सब सदस्य अपना धर्म
‘सनातन धर्म’ लिखवाएं।
भारतीय समाज में राष्ट्र को जागृत और जीवंत बनाने के लिए सदैव महान संतों ऋषिओ तपस्वियों ने जन्म लिया उनमे आदिशंकराचार्य बुद्ध महावीर विवेकानंद और स्वामी दयानंद सरस्वती ऐसे प्रमुख धर्म गुरु है जिनकी मान्यता और प्रभाव किसी एक संप्रदाय तक सीमित नहीं है, इन्हें व्यापक तौर पर ईश्वर का अंश अवतार माना जाता है,
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