
नई दिल्ली. देश के प्रधानमंत्री बनने जा रहे नरेन्द्र मोदी ने आज संसद भवन में पहली बार प्रवेश करते समय उसकी सीढ़ियों पर माथा टेक कर ‘‘लोकतंत्र के मंदिर’’ के प्रति सम्मान जताया। संसद भवन के मुख्य द्वार पंहुचने पर भाजपा नेताओं ने गुलदस्ते भेंट करके उनका स्वागत किया। अभिवादन स्वीकार करने के बाद मनोनीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रवेश द्वार की धरती को लोकतंत्र के मंदिर संसद को साष्टांग प्रणाम किया । बीजेपी नेता नरेंद्र मोदी अब देश के मनोनीत प्रधानमंत्री बन गए हैं। उन्हें राष्ट्रपति ने सरकार बनाने का न्योता सौंप दिया है। राष्ट्रपति भवन के प्रवक्ता ने औपचारिक ऐलान कर दिया है कि नरेंद्र मोदी 26 मई को शाम छह बजे प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे।
भाजपा संसदीय दल का नेता चुने जाने पर नरेंद्र मोदी आज भावुक हो उठे और अपने आंसू नहीं रोक पाये. संसद भवन के ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में लालकृष्ण आडवाणी द्वारा संसदीय दल के नेता के तौर पर उनका नाम प्रस्तावित किये जाने और सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, मुरली मनोहर जोशी आदि द्वारा उनका अनुमोदन किये जाने के बाद अपने भाषण के दौरान उन्हें रोना आ गया और अपने को संभालने में उन्हें कुछ समय लगा.
अपने संबोधन में वह यह कहते हुए भावुक हो उठे, आडवाणीजी ने एक शब्द का प्रयोग किया कि नरेंद्र भाई ने कृपा की. इतना कहने के बाद वह अपना रोना नहीं रोक पाए और कुछ देर तक सिर झुकाए खडे रहे और अपने को संभालने का प्रयास करते देखे गए. कुछ देर की खामोशी के बाद वह रुंधे गले से बोले, क्या मां की सेवा कभी कृपा हो सकती है? कतई नहीं हो सकती. जैसे भारत मेरी मां है, वैसे ही भाजपा भी मेरी मां है. और इसीलिए बेटा कभी मां पर कृपा नहीं कर सकता है.
बेटा सिर्फ समर्पित भाव से मां की सेवा करता है. मोदी ने कहा, कृपा तो पार्टी ने की जिसने मां की सेवा का मुझे अवसर दिया. संसद भवन पहली बार आने के संदर्भ में उन्होंने कहा, यहां मैं पहली बार आया हूं. शायद मेरे साथ हमेशा ऐसा होता है. पहले मैं मुख्यमंत्री बना (गुजरात का) और तब सीएम कक्ष देखा. आज भी ऐसा ही अवसर मिला है. उन्होंने कहा, मोदी दिखता है लेकिन इसलिए नहीं कि मोदी बहुत बडा है. मोदी इसलिए दिख रहा है क्योंकि पार्टी ने मुझे अपने कंधों पर बिठाया है.
नरेंद्र मोदी ने मंगलवार दोपहर राष्ट्रपति से मुलाकात की और एनडीए संसदीय दल के नेता के तौर पर सरकार बनाने का औपचारिक दावा पेश किया। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दावे को स्वीकार किया और उन्हें प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने का निमंत्रण दिया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आप अपने मंत्रीमंडल के नामों का भी सुझाव दें।
इस मुलाकात के बाद जब नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति भवन से बाहर आए तो वह देश के मनोनीत प्रधानमंत्री थे। उन्होंने पत्रकारों को राष्ट्रपति का निमंत्रण पत्र दिखाया और कहा, ‘राष्ट्रपतिजी ने मुझे शपथ लेने के लिए आमंत्रित किया है। 26 मई को शाम 6 बजे शपथ ग्रहण समारोह होगा। आप सभी का भी धन्यवाद।’
इसके कुछ ही देर बाद राष्ट्रपति भवन के प्रवक्ता ने इसका औपचारिक ऐलान किया।























