मंथन.कांग्रेस में संगठन या नेतृत्व दोनों ही नहीं हे, सारे कांग्रेसी क्षत्रप गांधी परिवार के संरक्षण में निश्चिन्तित्ता और चमत्कार का अनुभब करते हुए जनता के हित के
मुद्दो से दूरी बनाये रहते हे जेसे रामसेतू पर बहुसंख्यक विरोधी रूख का कार्य, योजना आयोग की अप्रासंगिक गरीबी रेखा की फूहड़ वकालत , विशेषतः भोजन की दरो में कुतर्क करते कांग्रेसी, खुद भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी पूरी केबिनेट, लेकिन गरीबो को पेट्रोल डीजल में करो में लगातार बढोतरी, गैस की टंकी की कतोत्री, कार्पोरेट को लूटा दी अरबो खरबों की बेंको में जमा गरीबो की जमा पूजी, प्राकृतिक संसाधन सम्पति को उपकृत हो लूटने छूट देते रहे, वाड्रा ने तीन साल में तीन सो करोड़ किस जादू से कमाए ये देश के पड़े लिखे युवा अब समझते हे, लोगो ने सोचा अदानी ने उद्योग लगाया लोगो को रोजगार तो दिया, एक व्यवस्था में सहयोग दिया , लेकिन वाड्रा के उपक्रम में तो कोई हे ही नहीं हे यहाँ तक स्वयं वाड्रा भी उसमे कभी कभार ही रूचि लेते हो, इन सबने युवा को अति उग्रता से आंदोलित किया अन्ना आन्दोलन ने प्रमाणित किया हे की भले जो पहले जो चलता आया वो सब अब जनता विशेषतः युवा बर्दास्त करने को बिलकूल तेयार नहीं, देश के लोग अन्ना रविशंकर या रामदेव के साथ नहीं , भारतीय संस्कृति को गौरवपूर्ण बनाने के विषय के आव्हान के साथ हे , रामसेतू तोड़ने का कुत्सित प्रयास करने वालो के साथ तो बिलकूल नहीं हे.
फसले बर्बाद होने से किसान आत्महत्या करते रहे , लेकिन सरकार किंगफिशर जेसी कंपनियो में पैसा डूबाती रही , सुप्रीम कोर्ट सरप्लस अनाज 70 करोड़ गरीब कुपोषण भूख से मरते देशवासीयो को देने के आदेश देता रहा, पर सरकार उसे सड़ा अपने पूंजीपति मित्रो को शराब बनाने के लिए नाममात्र मूल्य पर दे अपने चहेतों का लाभ करती रही, बीसीसीआई की अय्याशियों ने, आईपीएल जेसे आयोजनो ने खेल कानून की कमजोरियो ने नपुसक सरकार की भूमिका से देश को और क्रोधित किया , रूपया नीचे गिरा विदेशी निवेश को फायदा पहुचाया गया , भ्रष्टाचारियो का कई लाख करोड़ काला धन विदेशी बैंकों से तो बापस नहीं लाया गया , जबकि ईमानदार देशवासियो से भारी कर बसूले गए और उन्हें ही बताया की पेसे पेड़ पर नहीं लगते, देश के सेंटीमेंट्स के विरूद्ध लगातार पाकिस्तान की तरफदारी करने वाले को विदेश मंत्री बनाया, जबकि देश पकिस्तान को कठोर सबक सिखाना चाहता हे, देशवासियो को अपमानित कर फोज और उसके अधिकारियों की लगातार उपेक्षा की , सामान रैंक पेंशन सेना के नए वेतन आयोग के निर्णय लेने में कोताही बरत देशवासियो को आक्रोशित करना, निर्भया काण्ड प्रदर्शनों पर अत्याचार , लोकपाल पर टालामतूली , संसद का अपराधीकरण रोकने पर समय रहते कोई ठोस काम नहीं करना , आरटीआई कमजोर करने की नोकरशाही की कोशिसो आदि मुद्दो पर कांग्रेस का देश को और आम जनता को हमेशा ही चिड़ाने वाला घोर लापरवाहीपूर्ण स्टैंड रहा है ।
मजबूरी में जो कुछ भूमि सुधार, भोजन के कानून, सरकार ने जाते जाते बनाये उनका क्रियांबन भी ये नहीं कर सके, उस पर भी क्रेडिट लेने के प्रयास से खुद को ठगा सा महसूस करती जनता अब मूर्ख बनाने की कोशिशो से उबलपडी , देश के महत्पूर्ण मुद्दों पर कथित कांग्रेस नेतृत्व सोनिया राहूल ने तो आपराधिक चुप्पी धारण कर कांग्रेस को रसातल में पहुचने का कृत्य किया, गरीबो के हित में मनमोहन ने योजनाए तो बनायीं आबंटन भी किया जो की भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया, धरातल पर क्रियान्वित कोई उपलब्धि ही नहीं होने पर विरोधी उमीदवार की कमजोरियों को ही अपना अचूक हथियार बनाने का कांग्रेस के रणनीतिकारो का स्थायी प्रचार पैंतरा, उल्टा बूमरेंग हो कांग्रेस मुक्त भारत बना गया.
गांधी परिवार देश के मुद्दों से तादात्मय स्थापित नहीं कर पाता केवल अपने इतिहास के बलिदानो की दुहाई देता रहता हे.जबकि ये देश का चुनावी इतिहास हे की जनता किसी भी मुद्दे पर एक बार ही वोट देती हे बार बार घिसे पिटे राग अलाप कांग्रेस ने अपनी ही भद पिटवाई , सांप्रदायिकता विरोधी ध्रुवीकरण की कांग्रेसी चालो से वस्तुतः बहुसंख्यको में स्वतः ध्रुवीकरण होता चला गया, नरेन्द्र मोदी भाजपा ने विभिन्न मुद्दों का उचित अनुपात में आक्रामक और सही प्रचार रणनीति से प्रयोग कर , सुशासन विकास सकारात्मक भविष्य के वादे को अपना मुख्य फेस बनाया और कांग्रेस को पूर्णत अप्रासंगिक कर दिया , निसंदेह यह सब राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ की दूरगामी रणनीति रचना से ही संभव हो सका. आजादी की योद्धा कांग्रेस का गाँधी परिवार और घिसे पिटे सेकुलर जासूसी अदानी जेसे तुच्छ मुद्दो चुनावी कार्ड के भरोसे चुनाव में कूदना निश्चित ही उसकी आत्महत्या के सामान रहा जो उसके प्रतिबद्द वोटबैंक को भी उससे दूर ले गया, विपक्ष का नेता बनने की पात्रता भी कांग्रेस सोनिया राहूल को न मिलना कितनी बड़ी शर्मिंदगी का सबब हे.























