देहरादून. शनिवार रात से केदारनाथ क्षेत्र में बर्फबारी और उसके निचले इलाकों में जारी बारिश के कारण एक सप्ताह पहले शुरू हुई केदारनाथ मंदिर की यात्रा आज (रविवार) सुबह से रोक दी गयी है। गढ़वाल के चारधाम के नाम से प्रसिद्ध बद्रीनाथ तथा अन्य दो धामों गंगोत्री और यमुनोत्री में भी कल रात से बारिश जारी है। हालांकि फिलहाल वहां यात्रा अभी जारी है।
केदारनाथ के उपजिलाधिकारी उत्तम सिंह चौहान ने बताया कि कल रात से केदारनाथ क्षेत्र में जारी बर्फबारी और निचले इलाकों में बारिश के मद्देनजर यात्रा को आज सुबह से रोक दिया गया। चौहान ने बताया कि मौसम की खराब स्थिति को देखते हुए फिलहाल दो दिन तक तीर्थयात्रियों को केदारनाथ मंदिर की ओर रवाना नहीं किया जायेगा।
हालांकि, उन्होंने कहा कि कल मंदिर में दर्शन करने गये ज्यादातर श्रृद्धालु वापस नीचे आ गये हैं, जबकि करीब 200-250 यात्री केदारनाथ से लगभग चार किलोमीटर पहले लिनचौली में रुके हुए हैं। उन्होंने कहा कि केदारनाथ की ओर जा रहे श्रृद्धालुओं को भी बीच रास्ते में ही लिनचौली में रोक दिया गया है। उन्होंने बताया कि दर्शन के लिये जा रहे कुल 130 तीर्थयात्रियों को लिनचौली में रोका गया है।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा, ज्यादातर तीर्थयात्रियों को मंदिर के लिये पैदल यात्रा शुरू होने से पहले ही रोक लिया गया और उन्हें मौसम की स्थितियां सामान्य होने के बाद ही रवाना किया जायेगा। उधर, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री तथा आसपास के इलाकों में भी कल रात से रुक-रुक कर हल्की से मध्यम बारिश होने की खबर है, लेकिन फिलहाल यात्रा जारी है।
चमोली के जिलाधिकारी एसए मुरूगेशन ने बताया कि बद्रीनाथ में हल्की बारिश हो रही है, लेकिन फिलहाल स्थिति सामान्य हैं और यात्रा सुचारू रूप से चल रही है। उत्तरकाशी जिले में स्थित गंगोत्री और यमुनोत्री धाम तथा उसके निचले इलाकों में बारिश हो रही है, लेकिन वहां भी श्रृद्धालुओं का आवागमन जारी है।
मौसम विभाग ने आज के अलावा 12 और 13 मई के लिये जारी अपने पूर्वानुमान में सामान्य तौर पर आसमान में बदली छाये रहने तथा रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी जिले में कई स्थानों पर गरज के साथ मध्यम वर्षा होने की संभावना व्यक्त की है। पिछले साल आयी भीषण प्राकृतिक आपदा में हुए जानमाल के भारी नुकसान के बाद इस बार उत्तराखंड सरकार तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क है और सभी ऐहतियाती कदम उठा रही है।
छह महीने के शीतकालीन अवकाश के बाद इस महीने की शुरुआत में चार धामों के कपाट श्रृद्धालुओं के लिये खुलने के साथ ही यात्रा का आरंभ हुई थी। गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट जहां दो मई को अक्षय तृतीया के पर्व पर खोले गये थे, वहीं केदारनाथ मंदिर के पट चार मई को और बद्रीनाथ के पांच मई को खुले थे।
गोपेश्वर(चमोली)। सेना ने हेमकुंड साहिब तक पैदल मार्ग खोलने में सफलता हासिल की है। पैदल मार्ग खुलने के साथ ही गुरुद्वारे की टीम भी हेमकुंड साहिब पहुंच चुकी है। सेना के जवान अब वापसी में ग्लेशियरों को काटकर पैदल मार्ग को चौड़ा एवं सुरक्षित बना रहे हैं।
सेना के जवानों ने पैदल मार्ग की मरम्मत कर हिमखंडों को काटकर हेमकुंड तक का रास्ता सुचारु कर दिया
सिखों के तीर्थ स्थल हेमकुंड साहिब के कपाट 25 मई को खुलने हैं। सिख रेजीमेंट व इंजीनियरिंग कोर के जवान घांघरिया से हेमकुंड साहिब के बीच पांच किलोमीटर पैदल मार्ग की मरम्मत में जुटे थे। इस मार्ग में हिमखंडों से पैदल मार्ग जगह जगह क्षतिग्रस्त था। सेना के जवानों ने पैदल मार्ग की मरम्मत कर हिमखंडों को काटकर हेमकुंड तक का रास्ता सुचारु कर दिया है। सेना के जवानों के साथ साथ गुरुद्वारे की टीम भी हेमकुंड तक पहुंच गई है।
गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के स्वयं सेवकों ने हेमकुंड साहिब में शीतकाल के दौरान बर्फबारी से हुए नुकसान का अवलोकन किया है। हालांकि, अभी हेमकुंड साहिब में बर्फ जमी हुई है।
सेना के जवान अब हेमकुंड साहिब से वापस अटलाकोटी ग्लेशियर में हिमखंडों को हटाकर पैदल रास्ते को चौड़ा व सुरक्षित बना रहे हैं। गुरुद्वारा प्रबंधक गोविंदघाट सेवा सिंह ने बताया कि पैदल मार्ग खुलने के बाद गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के स्वयं सेवकों ने हेमकुंड साहिब में व्यवस्थाओं का जायजा लिया है। कहा कि यात्रा के लिए बेस कैंप गोविंदघाट को तैयार किया जा चुका है। वहीं, घांघरिया में भी गुरुद्वारे की व्यवस्थाएं सुसज्जित की जा रही हैं।
उत्तरकाशी, गंगा के उद्गम स्थल गोमुख की डगर आसान नहीं है। बीते साल आई आपदा से ध्वस्त हुआ गोमुख ट्रैक अब तक भी दुरुस्त नहीं हो सका है। लिहाजा गोमुख जाने वाले श्रद्धालुओं और ट्रैकरों को जान जोखिम में डालकर आवाजाही करनी पड़ रही है।
गंगोत्री से 14 किमी लंबा पैदल गोमुख ट्रैक बेहद खतरनाक हो चुका है। बीते साल आपदा के दौरान ट्रैक के कई हिस्से पूरी तरह से गायब हो चुके हैं। लिहाजा गोमुख का रुख करने वाले ट्रैकरों और श्रद्धालुओं को अस्थाई तौर पर बनाए गए खतरनाक रास्तों से होकर गुजरना पड़ रहा है। जहां हर वक्त पत्थर गिरने का भय बना रहता है। ट्रैक की बदहाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई जगह गंगोत्री नेशनल पार्क प्रशासन ने गायब रास्तों के स्थान पर रस्सी बांधी हुई हैं। इससे लटकर पर्यटकों को गोमुख का सफर करना पड़ता है। लिहाजा 14 किमी के इस पैदल सफर के हर पड़ाव पर ट्रैकरों को जान जोखिम में डालकर आगे बढ़ना पड़ रहा है। गोमुख का ट्रैक कर आए व्हेयर एगल्स डेयर के तिलक सोनी बताते है कि ट्रैक के दौरान खुद को सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती है। वहीं, गंगोत्री नेशनल पार्क प्रशासन ने दावा किया है कि जल्द ही गोमुख ट्रैक को आवाजाही के लिहाज से सुरक्षित बना लिया जाएगा। गौरतलब है कि आने वाले दिनों में गोमुख जाने वाले यात्रियों की संख्या में भारी इजाफा होगा। जल्द ट्रैक सुरक्षित ना होने पर यह ट्रैकरों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
तीन सौ से ज्यादा पर्यटक पहुंचे
गोमुख ट्रैक आवाजाही के लिए खुलने के साथ ही सप्ताह भर में 300 से ज्यादा देशी विदेशी पर्यटक गोमुख हो आए हैं। गोमुख का सफर कर लौटे जर्मनी के टेनगाय गुलियर ने बताया कि रास्ता बेहद जोखिम भरा है। इसे दुरुस्त करने की जरूरत है।






















