शांतिकुंज हरिद्वार स्वर्ण जयंती पर डाक टिकट जारी किया गया पर
आज दिनांक 20 जून 2021 को गंगा दशहरा गायत्री जयंती दिवस,
और परमपूजनीय गुरुदेव युगऋषि पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य के महाप्रयाण दिवस पर, शांतिकुंज हरिद्वार पर स्वर्ण जयंती वर्ष में भारत सरकार द्वारा डाक टिकिट जारी किया गया।

स्वर्ण जयंती वर्ष में शांतिकुंज पर डाक टिकट, केंद्र सरकार द्वारा जारी करने पर गायत्री परिजनों की और से केंद्र सरकार को
केंद्रीय मंत्री संचार, मुख्यमंत्री उत्तराखंड,
गायत्री परिवार प्रमुख श्रद्धेय प्रणव जी,
श्रद्धेय चिन्मय पंड्या जी
ने गरिमापूर्ण उपस्थिति दी।
का धन्यवाद आभार प्रकट किया गया।
शांतिकुंज 1971 में हरिद्वार में स्थापित किया हैं।

शान्तिकुञ्ज , हरिद्वार में गंगा तट पर स्थित एक स्थान है जहाँ अखिल भारतीय गायत्री परिवार का मुख्यालय है। शान्तिकुञ्ज के संस्थापक युगऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी हैं।

यह हरिद्वार के सप्त सरोवर क्षेत्र में ऋषिकेश मार्ग पर स्टेशन से ६ कि.मी. दूर महर्षि विश्वामित्र की तपःस्थली पर स्थित है।
‘युगतीर्थ ‘ कहे जाने वाले इस आश्रम में व्यक्ति-निर्माण, परिवार-निर्माण एवं समाज निर्माण की अनेक प्रभावशाली गतिविधियाँ नियमित रूप से चलती रहती हैं;

जैसे -जीवन जीने की कला के नौ दिवसीय सत्र (प्रतिमाह तीन), लोकसेवियों के युग शिल्पी सत्र (प्रतिमास १ से २९ तारीख तक), ग्राम्य विकास प्रशिक्षण, कुटीर उद्योग प्रशिक्षण, नैतिक शिक्षा हेतु शिक्षण-प्रशिक्षण, ग्राम स्वास्थ्य सेवियों के विशेष सत्र,
विविध प्रशासनिक अधिकारियों के लिये व्यक्तित्व परिष्कार सत्र आदि ।
ये सभी प्रशिक्षण निःशुल्क हैं देश-विदेश में स्थापित हजारों गायत्री शक्तिपीठों, प्रज्ञापीठों का मार्गदर्शन केन्द्र पत्राचार कक्ष साधकों, लोकसेवियों के लिये प्रेरणा-परामर्श की व्यवस्था है। सैकड़ों उच्च शिक्षित सेवाभावी स्वयं सेवक मात्र निर्वाह राशि लेकर सारी गतिविधियों को संचालित करते हैं।
यहाँ यज्ञशाला, गायत्री माता का मन्दिर, अखण्ड दीप, देवात्मा हिमालय मन्दिर, ज्ञान मंदिर (साहित्य विक्रय केन्द्र), ऋषियों के मन्दिर, हरीतिमा देवालय, देव संस्कृति दिग्दर्शन प्रदर्शनी, अस्पताल एवं चिकित्सा-केन्द्र आदि मुख्य स्थापनाएँ हैं। यहाँ वैज्ञानिक अध्यात्म पर अनुसन्धान होता है तथा तरह-तरह के शिविर संचालित किए जाते हैं।

स्थापनाएँ
(१) हजारों करोड़ गायत्री मंत्र जप से अनुप्राणित ‘अखण्ड दीप’
(२) हजारों नैष्ठिक साधकों द्वारा नित्य आहुतियों से पुष्ट ‘अखण्ड अग्नि’
(३) युगशक्ति गायत्री का प्राणवान मंदिर ; दिव्य जीवन विद्या के मूर्धन्य ‘सप्त ऋषि’
(४) आध्यात्मिक ऊर्जा के सनातन केन्द्र देवात्मा हिमालय का भव्य मंदिर
(५) मनुष्य में देवत्व जगाने वाले सभी धर्म-सम्प्रदाय के पवित्र प्रतीक चिह्न
(६) जड़ीबूटियों की दुर्लभ वाटिका और गायत्री परिवार की स्थापना से लेकर अब तक की गतिविधियों पर आधारित प्रदर्शनी आदि।

कुछ विशिष्ट धाराएँ
शान्तिकुञ्ज प्राचीन भारतीय परम्परा के अनुरुप सयुंक्त परिवारों के प्रचलन को प्रोत्साहित करने वाला आदर्श केन्द्र है। यह व्यक्तित्व गढ़ने की ‘टकसाल’ है, यहाँ पर अंतराष्ट्रीय स्तर का देव संस्कृति विश्व विद्यालय है । जाति, सम्प्रदाय, धर्म, पन्थ आदि संकीर्णताओं से ऊपर उठकर लोगों को यह जीवन जीने की कला सिखाता है। उन्हें आत्मवादी जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
हर धर्म-वर्ग के लोग यहाँ आकर साधना करते हैं, शिक्षण लेले हैं। यहाँ शरीर, मन व अंतःकरण को स्वस्थ, समुन्नत बनाने के लिए अद्वितीय अनुकूल वातावरण एवं मार्गदर्शन मिलते हैं।
यहाँ व्यक्ति को अन्धविश्वास, मूढ़मान्यता, भाग्यवाद आदि से उठकर विवेकवादी कर्मवादी बनने की प्रेरणा देता है। हर प्रथा परंपरा बात को तर्क-तथ्य और प्रमाण की कसौटी पर कसते हुए उसे विवेक पूर्वक अपनाने की प्रेरणा यहाँ दी जाती है।
यह विशाल आश्रम स्वयंसेवा से ही संचालित है। योग्यता के अनुसार कार्य और आवश्यकता के अनुसार साधन यहाँ रहने वाले परिवारीजनों को उपलब्ध कराये जाते हैं। सभी परस्पर हितों का ध्यान रखते हैं।

गायत्री चेतना (युगचेतना) का विश्वयापी विस्तार यहाँ से हो रहा है। पूरे विश्व में गायत्री परिवार द्वारा स्थापित 24000 से अधिक शक्तिपीठ- प्रज्ञापीठ- चेतना केंद्र व शाखाएँ हैं, जो की शांतिकुंज मुख्यालय की प्रेरणा और मार्गदर्शन में जनजागरण व अध्यात्म के पुनर्जीवन के कार्यों में संलग्न समर्पित हैं। यहाँ के शिक्षण में धर्म विज्ञान का समन्वय है जो धार्मिक गतिविधियाँ यहाँ चलायी जाती हैं, उनकी वैज्ञानिकता का शोध कर बोध भी कराया जाता है।






















