सरकारी बेंके आम उपभोक्ता से जमकर व्याज बसुलने के साथ बकाया पर पेनाल्टी का डंडा चलाती हे विश्व में सर्वाधिक व्याज वसूलने वाला देश भारत ही हे।
लेकिन एक करोर से ऊपर के कर्जदारो के प्रति आश्चर्यजनक तोर पर मुलायम बनी रहती हे । बेंको की कुल जमा पूँजी जो की आम आदमी के खून पसीने की गाडी पूँजी थी का पाच प्रतिशत तक जो कई लाख करोर से अधिक हे को ये बड़े कर्जदार खा गए।
अर्थात बड़े लोगो के क़र्ज़ लेकर खाने से बड़े एनपीए की वसूली भी इमानदार ग्राहक से बड़े व्याज के रूप में करने का पूरा दुष्चक्र मिलजुलकर फीलगुड से चल रहा हे ।
स्पस्ट मतलब सीधा सा ये कि कारोबारीओ राजनेताओ अफसरों बैंकरो का निहित स्वार्थपूर्ण गठजोड़ जिसमे सब दलो और कुछ मीडिया हॉउसो का भी सरक्षण हे देश को लूट रहे हे , क्या हार्वर्ड के प्रबंध विशेषज्ञ , बड़े नामीगिरामी कॉर्पोरेट वकील रहे पी चिदंबरम को ये नहीं पता ?






















