मंथन. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन राव भागवत ने शिक्षा वर्ग को मार्गदर्शन करते हुए स्पस्ट कहा कि जम्मू और कश्मीर पहले से भारत का अभिन्न अंग,विलय अन्य रियासतों के समान अंतिम ,पश्चात् में जोड़ दी गयी सुविधाए असवेधानिक, जम्मू और कश्मीर के मुख्यमन्त्री सरासर झूठ कहते है कश्मीर का भारत में विलय हुआ ही नहीं है, वो तो शर्तिया जोड़ है। सत्य तो यह हे की भारत में उस समय जितने राजा रजवाड़ा थे, उन्होंने जिस प्रकार विलय पत्र अभलेख पर हस्ताक्षर किए हैं उसी पर यहां कश्मीर के भी हस्ताक्षर हुए। वो अभिलेख विलय निर्णय बिना शर्त था , बिना शर्त है और वापस नहीं बदलने की प्रकृति का है। बाद में भी उसमें कोई बदल नहीं कर सकता ऐसे वाक्य उस कागज में स्पस्ट अंकित हैं। बहुत समय लेकर, ठीक विचार करके उस पर अगर हस्ताक्षर हुए हैं तो देश में राष्ट्रीय एकात्मता को लाने के लिए, देश को जोड़ना जिनका काम है वो लोग ऐसी अलगाव की बात कैसे कर सकते है ? कोई भी राष्ट्रवादी देश से अलगाव की बात सोच भी नहीं सकता.
जम्मू और कश्मीर के लोग शत्रुओं के आक्रमण को झेल रहे हैं। आतंकी गतिविधियों को झेल रहे हैं। भेदभाव की कुत्सित राजनीति को झेल रहे हैं। बेरोज़गारी, गरीबी, महंगाई की मार जो देश पर पड़ी वो जम्मू और कश्मीर पर भी पड़ी और भेदभाव के कारण कुछ ज्यादा ही पड़ी और पड़ रही है। कौन सी ऐसी समस्या है जो यहां नहीं है, सब है, हम उसका अनुभव कर रहे हैं। अब इन समस्याओं में कर्तव्य यह बनता है के देश के लोगों का हौसला बनाए रखना, देश के लोगों को जोड़ कर रखना। इस देश के मालिक जो समाज के सामान्य लोग हैं, हम लोग हैं, जनता है, हमारा काम है कि लोगो को देशवासियों को जगाना। उठ भारत जाग। और जागकर इन सबका नियंत्रण करके सबको ठीक पटरी पर चलाना। भय करने से, उदासीन होने से, मायूस होने से काम थोड़े ही चलेगा। हमको इस देश में रहना है। ये हमारा देश है। ये कश्मीर हमारी मातृभूमि है। पहले से हमेशा से रही है। । बाकी सारी बातें तो बाद की बातें हैं। प्रत्येक राष्ट्रवादी का दायित्व हे कश्मीर के सम्बन्ध में जागरूकता अभियान चलाये उसमे सम्मिलित हो पाच लाख से अधिक विस्थापितों को कश्मीरी पंडितो को बापस बसाया जाए.






















