संयुक्त राष्ट्र। भारत ने कहा है कि वह संयुक्त राष्ट्र वैश्विक आतंकवाद निरोधी रणनीति की चल रही वर्तमान समीक्षा के बाद पारित किसी भी ऐसे प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेगा जो आतंकवाद से लड़ने के प्रयासों को हल्का करता है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र वैश्विक आतंकवाद निरोधी रणनीति की चौथी वार्षिक समीक्षा के नतीजों पर अनौपचारिक विचारविमर्श में भाग लेते हुए यह बात कही।
उसने अफगानिस्तान के हेरात प्रांत में अपने वाणिज्य दूतावास पर ‘कायराना आतंकवादी हमले’ की कड़ी निंदा की। उसने कहा कि यह हमला एक बार फिर दर्शाता है कि अफगानिस्तान में आतंकवाद का मुख्य मकसद ‘उसके पुनर्निर्माण और विकास ’ को रोकना है। हमले का ‘‘अफगानिस्तान के बहादुर सुरक्षा बलों’’ ने ‘‘मुंहतोड़ जवाब’’ दिया।
भारत ने कड़े शब्दों में चीन के उरूमकी में 22 मई को हुए आतंकवादी हमले की भी निंदा की। भारत पक्ष ने कहा,‘‘ये दोनों आतंकी हमले महासभा के उस प्रस्ताव पर हमारे जोर दिए जाने की जरूरत दर्शाते हैं कि कोई भी कारण अथवा शिकायत आतंकवाद को न्यायोचित नहीं ठहरा सकती, जिसका जवाब दिया जाना चाहिए और जिसके लिए दंडित किया जाना चाहिए।’’
रणनीति की चौथी समीक्षा का समापन समारोह यहां 12-13 जून को होगा जिसके अंत में एक प्रस्ताव पारित किया जाएगा। भारत ने इस बात पर जोर दिया कि वह ऐसे किसी प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेगा जो आतंकवाद की बुराई को लड़ने के हमारे प्रयास को हल्का करता हो। यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से हमारा आतंकवादी गतिविधियों के देशों और पीड़ितों के प्रति मजबूत योगदान होगा।’’
भारत ने संयुक्त राष्ट्र आतंकवादी निरोधी रणनीति के चार स्तम्भों के ‘समावेशी दृष्टिकोण और संतुलित क्रियान्वयन ’ का आह्वान करते हुए कहा कि ऐसा करते समय कतई बर्दाश्त नहीं करने के उद्देश्य को ध्यान में रखा जाय जिसका संयुक्त राष्ट्र ने समर्थन किया है।






















