मंथन. देहरादून: एक्जिट पोल के नतीजे से उत्साहित रास्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अखिल भारतीय सह संपर्क प्रमुख राम माधव ने पहली बार स्वीकार किया कि इस चुनाव में संघ के दो मिशन थे एक देश की मौजूदा व्यवस्था में परिवर्तन और दूसरा आम चुनाव में वोट के लिए लोगों में जागरुकता फैलाना, उनके संगठन ने भाजपा का पूरी तरह समर्थन किया । आरएसएस के स्वयंसेवक खुलकर चुनाव मैदान में आए और जनता को परिवर्तन के लिए प्रेरित किया। आरएसएस का मिशन सफल हो गया है, क्योंकि इस बार जनता ने परिवर्तन के लिए वोट दिया है।
बुधवार को विश्व संवाद केंद्र की ओर से नगर निगम के टाउन हॉल में आयोजित महर्षि नारद जयंती समारोह कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए संघ प्रवक्ता राम माधव ने भाजपा की दिल्ली में संभावित सरकार में आरएसएस की भूमिका के सवाल पर कहा कि आरएसएस मोदी सरकार में दखल नहीं देगा और स्पष्ट किया कि नई सरकार आरएसएस की नीति से बखूबी वाकिफ हैं। इसलिए रिमोट जैसी कोई बात नहीं रहेगी।
भाजपा नेता गिरीराज सिंह के बयान कि ‘सभी आतंकी एक समुदाय से’ सवाल पर राम माधव ने कहा कि इस बारे में वह कुछ नहीं कहेंगे। वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के बारे में पूछे गए सवाल पर भी राम माधव चुप्पी साध गए। यूपी में भाजपा के लिए ऑक्सीजन का काम करने वाले राम मंदिर से संबंधित सवाल पर आरएसएस नेता ने स्पष्ट कहा कि उनके एजेंडे में यह मुद्दा नहीं था। आरएसएस के दो मुद्दे थे देश की मौजूदा व्यवस्था में परिवर्तन और दूसरा आम चुनाव में वोट के लिए लोगों में जागरुकता फैलाना। चुनाव खत्म हो चुके हैं, आरएसएस के दोनों मिशन सफल हुए हैं। जनता ने परिवर्तन के लिए वोट डाला है और रिकार्ड वोटिंग हुई है।
क्या हे संघ
रास्ट्रीय स्वयं सेवक संघ हिंदू राष्ट्रवादी संघटन है लक्ष्य हे सनातन संस्कृति की मान्यताओ परम्पराओ को प्रोन्नत करना, मातृभूमि के लिए नि:स्वार्थ सेवा करना . संघ का तरीक़ा हे समूह चर्चा, बैठकों और अभ्यास के माध्यम से शारीरिक और मानसिक प्रशिक्षण , जिसके सिद्धान्त हिंदुत्व में निहित और आधारित हैं के ज्यादातर कार्यों का निष्पादन शाखा के माध्यम से ही होता है, जिसमें सार्वजनिक स्थानों पर सुबह या शाम के समय एक घंटे के लिये स्वयंसेवकों का परस्पर मिलन होता है। वर्तमान में पूरे भारत में संघ की लगभग एक लाख से अधिक शाखा या प्रकल्प हैं। विश्वभर में भी संस्कृति सेवा संस्कार प्रसार का कार्य चलता है, पर यह कार्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नाम से नहीं अन्य प्रकल्पो के माध्यम से चलता। कहीं पर “भारतीय स्वयंसेवक संघ” तो कहीं “हिन्दू स्वयंसेवक संघ” के माध्यम से चलता है। वस्तुत: शाखा ही संघ की बुनियाद है जिसके ऊपर आज यह इतना विशाल संगठन खड़ा हुआ है। शाखा की सामान्य गतिविधियों में खेल, योग, वंदना और भारत एवं विश्व के सांस्कृतिक पहलुओं पर बौद्धिक चर्चा-परिचर्चा शामिल है. जिनमे एक करोड़ स्वयंसेवकों के जुड़े होने का अनुमान लगाया जाता हे.बीजेपी की असली ताकत संघ का निष्ठावान रणनीतिकार और प्रेरक स्वयंसेवक देश के हर गली मोहल्ले चप्पे चप्पे पर अपने संपर्क के व्यक्तियों को अपने मिशन से मजबूती से जोड़ते रहना हे.























