नई दिल्ली। देशभर में कड़े चुनावी मुकाबले के बाद जैसे जैसे परिणाम का दिन नजदीक आ रहा है, कांग्रेस पहले से ज्यादा विस्तृत संप्रग-3 के विचार पर काम करने लगी है जिसमें नये घटक दलों को शामिल किया जाए और नेतृत्व का विकल्प खुला रखा गया है ताकि किसी भी तरह नरेंद्र मोदी को रोका जा सके।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने पहचान जाहिर नहीं होने की शर्त पर कहा, ‘‘सभी विकल्प खुले भी हैं और नहीं भी खुले। यह सब हमें और भाजपा को मिलने वाली सीटों की संख्या पर तथा उनके अंतर पर निर्भर करेगा।’’
कांग्रेसी नेता ने कहा कि उनकी पार्टी एक जिम्मेदार राष्ट्रीय दल की अपनी भूमिका को दरकिनार नहीं कर सकती ताकि राष्ट्रीय हित में एक स्थिर सरकार आए और इस दिशा में सभी समान विचार वाले दलों के साथ काम किया जाएगा। यह सारी चीजें इस आधार पर आकार लेंगी कि क्षेत्रीय दलों को किस तरह का जनादेश मिलता है और इनमें से किसे ज्यादा सीटें मिलती हैं क्योंकि इनमें से कुछ दल ऐसे हैं जो किसी भी हालत में मोदी से हाथ नहीं मिलाएंगे।
नेता ने कहा, ‘‘नेतृत्व का मुद्दा बाद में आएगा।’’उन्होंने कहा कि संख्या के आधार पर कांग्रेस नेतृत्व की भूमिका पर जोर नहीं देने का विकल्प भी खुला रखेगी। दूसरी तरफ पार्टी में एक बड़ा तबका इस बात पर जोर दे रहा है कि कांग्रेस को सरकार को न केवल स्थिरता देने के लिए बल्कि मजबूती और विशेषज्ञता प्रदान करने में भी भागीदारी अदा करनी चाहिए।
कांग्रेस के नेता ने कहा, ‘‘हम इस बात को अच्छी तरह समझते हैं कि महज 20 सीटें रखने वाला दल तो 100 से अधिक सीटों वाली पार्टी की अगुवाई करने का प्रयास नहीं करेगा।’’उन्होंने कहा कि कांग्रेस का मानना है कि उसकी सीटों की संख्या पिछले चुनावों के मुकाबले कम होने जा रही है।
पिछले करीब 25 सालों में देखने को मिला है कि कांग्रेस और भाजपा को मिलाकर करीब 300 के आसपास सीटें मिलती रहीं हैं वहीं बाकी सीटें क्षेत्रीय दलों के खातों में गई हैं। कांग्रेस का एक वर्ग ऐसा भी है जो चाहता है कि अगर पार्टी को सरकार बनाने के लिए सम्मानजनक संख्या नहीं मिलती तो वह विपक्ष में बैठे।
हालांकि नेता ने माना कि 1989 के बाद से हालात बदले हैं जब राजीव गांधी ने कांग्रेस के सबसे बड़े दल के तौर पर उभरने के बावजूद विपक्ष में बैठना मंजूर किया था। उन्होंने कहा कि 2009 में कांग्रेस को 206 सीटें मिली थीं और इस बार 130 या अधिक सीटें मिलना बहुत बड़ी कमी नहीं माना जाएगा। नेता ने कहा, ‘‘हम दरवाजा बंद क्यों कर दें। अनेक दल ऐसे हैं जो हमें समर्थन देने के लिए आगे आएंगे।’’
मोदी को रोकने के लिए तीसरे मोर्चे को बाहर से समर्थन देने के विचार को कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने कुछ दिन पहले खारिज कर दिया था। सिंह ने इस बात पर जोर दिया था कि किसी भी गठबंधन सरकार के प्रभावी कामकाज और स्थिरता के लिए प्रभुत्वशाली दल को सरकार की कमान संभालनी चाहिए। कांग्रेस प्रवक्ता शशि थरूर ने आज एआईसीसी ब्रीफिंग में कहा कि कांग्रेस जहां चुनाव जीतने की दौड़ में है वहीं भारत में ‘सत्ता विरोधी विचार की भावना’ बनती रहती है।





















