मुजफ्फरपुर। बिहार में अकेले चुनाव लड रहे जनता दल युनाइटेड (जदयू) में पहली बार आंतरिक विरोध खुल कर सामने आ गया है। चुनाव हारने की आशंका में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने अपने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर ही निशाना साधा, पार्टी के एक उम्मीदवार की भी सभा के दौरान ही बखिया उधेड दी।
शरद यादव ने अपने पार्टी उम्मीदवार के प्रचार के दौरान बिहार के लोगों से माफी मांगते हुए कहा कि राज्य की बदहाली के लिए वह जिम्मेदार हैं, क्योंकि उन्होंने पहले लालू और बाद में नीतीश को सत्ता पाने में मदद की। शरद यादव ने कहा, दोनों (नीतीश-लालू) ने मेरे अंदर रहकर राजनीति की। दुख होता है कि ये जात-पांत से ऊपर नहीं उठ सके।
जदयू अध्यक्ष ने कहा, इस राज्य ने कर्पूरी ठाकुर जैसे लोगों की राजनीति को देखा है, जो सच्चे समाजवादी थे। लालू ने क्या किया हर कोई जानता है, उन्होंने बिहार के सम्मान को ठेस पहुंचाई है। नीतीश ने भी लालू के रास्ते को ही चुना है। शरद यादव ने शुRवार को जदयू उम्मीदवार कैंडिडेट विजेंद्र चौधरी को भी नहीं बख्शा। उन्होंने मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से जदयू प्रत्याशी चौधरी को “पार्टी हॉपर” बता दिया। गयाघाट में एक चुनाव रैली को संबोधित करते हुए चौधरी को उनके पाला बदले की आदत को लेकर फटकार लगाई। उन्होंने कहा, अब आया ऊंट पहाड के नीचे। उन्होंने चौधरी का मजाक उडाते हुए यह बात कही, जो उनके बगल में खडे थे। चौधरी हाल ही में लोजपा से जदयू में शामिल हुए थे। इससे पहले वह राजद के साथ थे और मुजफ्फरनगर से निधानसभा चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत चुके हैं। कांग्रेस के अखिलेश सिंह और भाजपा के अजय निषाद का मुकाबला करने के लिए उन्हें जदयू से टिकट दिया गया है।
शरद ने इस दौरान विपक्षी दलों पर निशाना साधने के साथ-साथ नीतीश को भी आडे हाथों लिया। शरद यादव ने कहा कि लालू और नीतीश की राजनीति से केवल बिहार को नुकसान हुआ है। वाराणसी में केजेरीवाल के लिए जदयू के समर्थन की खबर को भी शरद यादव ने नकार दिया। जदयू नेता केसी त्यागी पर निशाना साधते हुए शरद यादव ने कहा कि यह उनका निजी मामला है, पार्टी से उन्हें कोई लेना-देना नहीं है। केसी त्यागी ने ही केजरीवाल को जदयू के समर्थन का ऎलान किया था। शरद यादव की बातों को सुनकर मंच पर मौजूद पार्टी नेता आश्चर्यचकित रह गए।
लोकसभा चुनावों के नतीजे घोषित होने से पहले ही शरद यादव के ये तेवर इस बात का सबूत हैं कि जदयू में कुछ ठीक नहीं चल रहा। शरद यादव की इस तल्खी के कई कारण गिनाए जा रहे हैं। शरद यादव के संसदीय क्षेत्र मधेपुरा में वोटिंग हो चुकी है। इस बार मधेपुरा में शरद यादव के लिए सीट को बचाने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड रहा है। भाजपा उम्मीदवार विजय कुशवाहा और राजद उम्मीदवार पप्यू यादव से उन्हें कडी चुनौती मिल रही है। अगर यादव वोट बंटते हैं, तो शरद यादव के यहां से हारने की भी आशंका जताई जा रही है। शरद यादव राजग से गठबंधन तोडने के फैसले के भी खिलाफ थे। यह फैसला नीतीश कुमार का था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में गठबंधन टूटने का खामियाजा जदयू को उठाना पड सकता है। इसे भी शरद यादव की नाराजगी का एक बडा कारण बताया जा रहा है।






















