नई दिल्ली। 13 दिसंबर 2001 भारत के इतिहास में दर्ज ऎसी तारीख है जिसका कोई भी अंदाजा नहीं लगा सकता था कि उस दिन विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के मंदिर पर हमला हो सकता है। आज से पूरे 12 साल पहले लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के पांच आतंकियों ने संसद पर हमला किया था। हमले से पूरा देश थर्रा गया था कि आखिर में संसद पर हमला कैसे हो सकता है। हमले के वक्त संसद में केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों सहित 200 लोग मौजूद थे। हमले में दर्जनभर लोगों की मौत हो गई थी जिसमें आठ सुरक्षाकर्मी शामिल थे। इस हमले का नतीजा यह रहा कि हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के संबंधों में और ज्यादा दरार आ गई थी।
देश के सबसे ज्यादा सुरक्षित परिसर में घुसने के लिए आतंकियों ने गृह मंत्रालय के लगे स्टिकर की कार और सेना की वर्दी का सहारा लिया। हमले के 40 मिनट पहले ही संसद के दोनों सदनों को ताबूत घोटाले पर बवाल होने की वजह से स्थगित कर दिया गया था। जिसकी वजह से कुछ सांसद संसद की बिल्डिंग से बाहर थे तो कुछ सांसद सेंट्रल हॉल और लाइब्रेरी की तरफ थे। संसद मार्ग से आई सफेद रंग की एंबैसेडर कार लोहे के दरवाजों को पार करते हुए राज्यसभा की तरफ जाने वाले रास्ते से अंदर घुसी। उसी वक्त तत्कालिन उप राष्ट्रपति कृष्णकांत घर जाने की तैयारी कर रहे थे। उनका काफिला वहां खड़ा था। वहां पर मौजूद दिल्ली पुलिस के असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर जीतराम को देखकर कार ने अपनी स्पीड और ज्यादा तेज बढ़ा ली। बाद में कार ने अपना रास्ता बदल लिया और दूसरी तरफ मुड़ गई। जीतराम को शक हुआ और उसने कार को रूकने के लिए कहा। तभी आतंकी ने कार को रोककर पीछ की तरफ लेनी शुरू कर दी, उसी दौरान कार उप राष्ट्रपति के काफिले से टकरा गई।
संसद परिसर में मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने कार को रोकने के लिए हल्ला मचाना शुरू किया लेकिन वे लोग रूकने का नाम नहीं ले रहे थे। कार के पास मौजूद कुछ सुरक्षकरि्मयों ने शक होने पर अपनी पोजिशन संभालनी शुरू की। तभी संसद के गेटों को बंद कर दिया गया ताकि संसद के अंदर आतंकी न घुस पाएं। आतंकियों ने अपनी कार संसद के गेट नंबर 9 की तरफ मोड़ दी जहां से प्रधानमंत्री राज्यसभा में अंदर जाते थे। लेकिन कार उनसे संभल नहीं पाई और जाकर पत्थर से टकरा गई। उसी वक्त पांचों आतंकी कार से बाहर निकले और कार में विस्फोट करने की कोशिश की। लेकिन सुरक्षाकर्मियों द्वारा फायरिंग करने की वजह से वे उसमें कामयाब नहीं हो पाए।
सुरक्षा बलों द्वार पोजिशन लेकर फायरिंग करने के बाद आतंकियों ने भी अंधा-धुंध फायरिंग शुरू कर दी। आतंकी फायरिंग करते हुए संसद के अंदर एंट्री करने की कोशिश कर रहे थे। आतंकी गोलियां चलाते और हैंड ग्रेनेड फेंकते हुए संसद में एंट्री करने की कोशिश करते रहे। संसद के सुरक्षाकरि्मयों ने सांसदों और मीडिया के लोगों को सुरक्षित जगह पर छिपाकर बचाया। तत्कालीन गृह मंत्री लाल कृष्ण आडवाणी और कैबिनेट के दिग्गज मंत्रियों को संसद भवन में ही एक खुफिया ठिकाने पर ले जाया गया।
हमले की वजह से पूरे परिसर में जबरदस्त अफरातफरी मची गई। सुरक्षाबल सांसदों को सुरक्षित रखने की भरपूर कोशिश कर रहे थे। आतंकी जख्मी होने के बाद भी फायरिंग करते हुए संसद भवन की ओर जा रहे थे। इसी दौरान संसद की फोन लाइन को भी काट दिया गया ताकि आतंकी संसद के संचार सिस्टम का इस्तेमाल न कर पाएं। तीन आतंकियों को संसद के गेट नंबर 9 के पास मार गिराया गया। इनमें से एक आतंकी गेट नंबर 5 तक पहुंच गया। वहां पर आतंकी लगातार हैंड ग्रेनेड भी फेंक रहा था। वहां पर मौजूद दिल्ली पुलिस के एक सिपाही ने आतंकी पर फायरिंग कर दी जिससे चौथा आतंकी भी ढेर हो गया। बाद में पांचवा आतंकी अंधाधूंध फायरिंग करते हुए गेट नंबर एक की तरफ चला गया। इसी गेट से सांसद और मंत्री संसद के अंदर प्रवेश करते हैं। तभी सुरक्षाबलों ने उस आतंकी पर गोली चलाई। आतंकी ने अपने शरीर पर विस्फोटक बांध रखे थे। विस्फोटक पर गोली लगने से एक जबरदस्त धमाका हुआ और आतंकी के शरीर की धज्जियां उड़ गई।
पांच आतंककारी मार गिराने के बाद भी सुरक्षाबलों को यह पता नहीं था कि कुल कितने आतंकियों ने संसद पर हमला किया है। उन्हें आशंका थी की कहीं कोई आतंकी संसद भवन के अंदर घुसने में कामयाब न हुआ हो। बाद में बम निरोधी दस्ता, एनएसजी के कमांडो वहां पहुंच गए। कार की तलाशी लेने पर उसमें गोला-बारूद भरा बैग मिला साथ ही एक बैग से खाने-पीने के सामान से भरा भी मिला। उनकी योजना सांसदों को बंधक बनाकर कई दिनों तक संसद में रूकने की थी। परिसर से दो जिंदा बम भी मिले थे। जिस कार से आतंकी आए थे, उसमें 30 किलो आरडीएक्स था।
हमला करने के आरोप में आतंकी अफजल गुरू को गिरफ्तार किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने अफजल गुरू को वर्ष 2004 में ही मौत की सजा सुना दी थी। लेकिन उसकी पत्नी ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजी थी को ख़ारिज कर उसे 3 फरवरी 2013 को फांसी दे दी गई।




















