मंथन.जन लोकपाल के लिए चार दिन से आमरण अनशन पर बैठे समाजसेवी अन्ना हजारे के मंच से जनरल वीके सिंह ने आप और केजरीवाल टीम पर आरोप लगते हुए कहा कि जब अन्नाजी ने जन लोकपाल के लिए आवाज उठाई तो कई लोग उनके साथ थे, लेकिन बाद में वे अलग हो गए और कहने लगे कि उनकी वजह से अन्ना जी यहां हैंजनरल सिंह ने अपने भाषण में बिना नाम लिए आप के नेताओं पर अन्ना का फायदा उठाने का आरोप लगाया, इस पर सामने बैठे आप नेता गोपाल राय ने आपत्ति जताते हुए सिंह को नरेंद्र मोदी का एजेंट करार देते हुए जनरल सिंह को टिकट के लालच में मोदी का चक्कर काटने वाला बताया।
इससे क्षुब्ध होकर अन्ना ने माइक अपने हाथ में ले लिया और टीम केजरीवाल के प्रति अपनी नफरत का इजहार करते हुए राय को बुरी तरह दुत्कारते हुए कहा कि हमने आपसे अनशन पर बैठने से मना किया था लेकिन आप बैठे। अब लोग आपसे कह रहे हैं कि टोका-टोकी मत कीजिए, आप गांव से चले जाइए। यहां मत बैठिए। हालांकि, राय ढिठाई से अन्ना को पितातुल्य बताते रहे और मीडिया को बाइट देते रहे। इससे गांव के सरपंच ने कहा कि आप अन्ना को दुख मत पहुंचाइए और यहां से फौरन चले जाइए।
इसके बाद गांव छोड़कर दिल्ली लौट रहे राय ने कहा कि एजेंडा जन लोकपाल है लेकिन मोदी का चक्कर काटने वाला व्यक्ति धोखेबाजी की बात कर रहा है। कई लोगों को हमारी एकता पच नहीं रही है और वे अन्ना का कान भर रहे हैं। उन्होंने अन्ना से दूरी बनने के इनकार करते हुए कहा कि हमारा एक ही लक्ष्य है जन लोकपाल। इसमें दूरी नहीं हो सकती। यदि अन्ना जन लोकपाल के लिए अनशन नहीं कर रहे होते तो हम यहां नहीं आते।
अनशन पर बैठे अन्ना हजारे को सचेत करते हुए आप नेता सिसौदिया ने कहा है कि कांग्रेस-भाजपा के एजेंटों से सचेत रहें अन्ना, कांग्रेस और भाजपा के कुछ एजेंट राज्यसभा में लंबित लोकपाल विधेयक को अच्छा बताकर उनका समर्थन हासिल करना चाहते हैं। आप नेता मनीष सिसौदिया ने कहा कि लोकपाल बिल एक जोकपाल है। इसमें भ्रष्टाचार के आरोपियों को ही लोकपाल नियुक्त करने का अधिकार दिया गया है। भाजपा का कहना हे , आप अनशन को हाईजैक करना चाहती है.
गौरतलब हे कि टीम केजरीवाल के बगेर इस बार अन्ना का अनशन फ्लाप चल रहा था, एक तरफ उसे कांग्रेस के इशारे पर किया बताया जा रहा था , दूसरी और उसमे बीजेपी से जुडी किरण बेदी और वीके सिंह अन्ना को घेरे हे. अब यह समझना मुश्किल नहीं हे कि सियासी दलों ने अन्ना और केजरीवाल टीम के मध्य दूरिया बढाने में कामयाबी हांसिल कर आजादी की दूसरी लडाई को आखिरकार पंचर कर ही दिया.






















