मंथन। दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन पर भारतीय सेना की मोजुदगी पर पाक ने पुनः अनर्गल प्रलाप किया । उसने कहा है कि भारतीय सेना की मौजूदगी के कारण पर्यावरण को हो रही क्षति और प्रदूषण से ग्लेशियर को गंभीर खतरा पहुंच रहा है जो देश के लिए जल आपूर्ति का मुख्य स्त्रोत है पाकिस्तान जल संकट का सामना कर रहा है और उसके मुख्य जल स्त्रोत को सैनिकों के दैनिक उपयोग की वस्तुओं के कचरे से ग्लेशियर के अस्तित्व को खतरा पैदा हो गया है
सियाचिन ग्लेशियर या सियाचिन हिमनद (en:Siachen Glacier) हिमालय पूर्वी कराकोरम रेंज में भारत-पाक नियंत्रण रेखा के पास लगभग देशान्तर:77.10 पूर्व, अक्षांश:35.42 उत्तर पर स्थित है। यह काराकोरम के पांच बडे हिमनदों में सबसे बड़ा और विश्व का दूसरा सबसे बड़ा हिमनद है। समुद्र तल से इसकी ऊँचाई इसके स्रोत्र इंदिरा कोल पर लगभग 5753 मीटर और अंतिम छोर पर 3620 मीटर है। यह लगभग 70 किमी लम्बा है। निकटवर्ती क्षेत्र बाल्टिस्तान की बोली बाल्टी में “सिया” का अर्थ है एक प्रकार का “जंगली गुलाब” और “चुन” का अर्थ है “बहुतायत”, इसी से यह नाम प्रचलित हुआ।
सामरिक रुप से यह भारत और पाकिस्तान के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह विश्व का सबसे ऊंचा युद्ध क्षेत्र है। इस पर सेनाएँ तैनात रखना दोनों ही देशों के लिए महंगा सौदा साबित हो रहा है। सूत्रों का कहना है कि सियाचिन में भारत के 10 हजार सैनिक तैनात हैं, और इनके रखरखाव पर प्रतिदिन 5 करोड़ रुपये का खर्च आता है। तकरीबन तीन दशक से भारत और पाकिस्तान की सेनाएं इस निर्मम युद्ध क्षेत्र में एक अंतहीन लड़ाई लड़ रही हैं. यहां तापमान शून्य से 55 डिग्री सेल्सियस (- 55 डिग्री सेल्सियस) से भी नीचे चला जाता है. यहां जितने सैनिक गोलियों से नहीं मरते उससे कहीं अधिक हिमस्खलन के कारण शहीद हो जाते हैं. कई सैनिक अकेलेपन के कारण अवसाद का शिकार हो जाते हैं. ऐसी घटनाओं का शिकार सिर्फ भारतीय सैनिकों को ही नहीं होना पड़ता, बल्कि पाकिस्तानी सैनिकों की स्थिति भी यही है. इस युद्ध क्षेत्र को याद करते हुए एक सैनिक ने कहा था, ‘मुझे कौए पसंद हैं, क्योंकि हमारे अलावा वे ही एकमात्र जीवित प्राणी होते हैं, जिन्हें हम यहां देख सकते हैं. भीषण ठंड के मौसम में जब वे चले जाते हैं तो उस दौरान के अकेलेपन को मैं बयां नहीं कर सकता. यह बहुत ही भयावह जगह है, जहां हमारे अलावा न कोई दूसरा आदमी है और न कोई अन्य साधन. यह सीमाओं की रक्षा की जंग नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व और खुद को जीवित बचाए रखने की जंग है.
वर्ष 1984 से ही दुनिया के इस सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र पर दोनों देशों की सेनाएं जमी हुई हैं। हालांकि वर्ष 2003 में युद्ध विराम लागू होने के बाद से यहां बंदूकें शांत हैं, लेकिन ग्लेशियर पर प्रतिकूल मौसम ने दोनों पक्षों के सेंकडो लोगों की जान ली है। पर्यावरणविदों के मुताबिक हिमालय और काराकोरम में मानव गतिविधियां बढ़ने से ग्लेशियर तेजी से सिकुड़ रहा है। पाकिस्तान ने कहा कि भारत और पाकिस्तान विभिन्न माध्यमों से जल विवाद को हल करने में व्यस्त हैं, जिनमें संयुक्त वार्ता और सिंधु जल आयोग भी शामिल है।























