लखनऊ. 250 साल पुराने संस्कृत विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मेडल लेने के लिए गाउन पहनने की अनिवार्यता के चलते जमकर हंगामा हुआ। गाउन न पहनने वाले छात्रों को पुलिस ने बलपूर्वक समारोह स्थल से बाहर किया तो समर्थन में सैकड़ों छात्रों ने समारोह का बहिष्कार कर दिया। 38 हजार छात्रों में से बमुश्किल एक-दो फीसदी ही छात्र डिग्री लेने के लिए मौजूद रहे। इतनी सीमित संख्या में छात्रों के बीच डिग्री-मेडल बांटने की औपचारिकता पूरी हुई।
दीक्षांत समारोह में मेडल पाने वाले छात्रों के गाउन पहनने की पंरपरा पुरानी है, लेकिन इसका विरोध पहली बार हुआ। सर्वाधिक 9 गोल्ड मेडल पाने वाले छात्र सुमन चंद पंत समेत आधा दर्जन छात्रों ने गाउन को लेकर अपना विरोध पहले ही दर्ज करा दिया था। छात्रों का कहना रहा कि गाउन पहनना अंग्रेजों पाश्चात्य संस्कृति का प्रतीक है, इसलिए वे पारंपरिक वेशभूषा(धोती-कुर्ता) में रहेगें। छात्रों की बात को विश्वविद्यालय प्रशासन ने अनसुना कर दिया। दीक्षांत समारोह शुरु होने के समय ये छात्र बिना गाउन के पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे तो पहले इन्हें गाउन पहनने के लिए मनाने की कोशिश हुई। बात न बनने पर पुलिस व प्रशासनिक अफसरों ने कमान संभाली और पुलिसवालों ने बिना गाउन में मेडल लेने आये छात्रों को समारोह स्थल से जबरन बाहर कर दिया।पुलिस कार्रवाई का जबर्दस्त विरोध हुआ। जमकर नारेबाजी के बीच समारोह में आये ज्यादातर छात्र बहिष्कार कर चले गये।





















