पांच वर्ष पहले हुए आतंकी हमले के बाद किए गए अनेक सुरक्षा इंतजामों के बावजूद मुंबई महानगर की सुरक्षा व्यवस्था में अब भी कई सुराख बाकी हैं। ये सुराख सरकारी सुरक्षा व्यवस्था से लेकर नागरिकों के व्यवहार तक में देखे जा सकते हैं।
भारत और अमरीका के दबाव के बावजूद मुंबई हमलों के लिए कथित रूप से ज़िम्मेदार लश्कर-ए-तैयबा के ख़िलाफ़ पाकिस्तान में अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. लश्कर पर काम कर रहे विशेषज्ञों और अमरीका में कुछ ही समय पहले जारी किए गए एक रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में उसकी जड़ें अब काफ़ी गहरी हो चुकी हैं.पिछले चार सालों में लश्कर काफ़ी ताक़तवर हो चुका है और उसकी जड़ें अब सिर्फ़ पाकिस्तान के पंजाब सूबे में ही नहीं बल्कि बलूचिस्तान, सिंध और ख़ैबर पख़्तूनख्वाह सूबों तक फैल चुकी है.लश्कर-ए-तैयबा अब पाकिस्तान में एक समाजी सियासी तंज़ीम जमात उद दावा के नाम से सक्रिय है.मुंबई हमलों को आज पांच साल पूरे हो गए हैं. इस दौरान रक्षा विश्लेषकों का एक ही सवाल रहा है कि लश्कर के प्रमुख हाफ़िज़ सईद को लेकर आख़िर अमरीका सख़्त रवैया क्यों नहीं अपना रहा है?





















