भोपाल नर्मदा चम्बल की 70 सीटो पर बीजेपी को कड़ी टक्कर किसी भी पक्ष को बहुमत मिल सकता हे .2008 से इस बार मिजाज ज्यादा गर्म है। भाजपा को नर्मदा और भोपाल जोन में इस बार मजबूत चुनोती रहेगी। नर्मदा जोन भोपाल जोन में कांग्रेस अधिक सीटें जीत सकती है। ग्वालियर चंबल क्षेत्र में कांग्रेस को ज्यादा फायदा हो सकता है। इसकी वजह कई हैं। त्रिकोणीय मुकाबला भी, जातीय गणित भी और सिंधिया घराने और दिग्विजय का प्रत्येक विधानसभा सीट पर प्रभाव भी हे। कुल मिलाकर 2008 में इन 70 में से 43 सीटें भाजपा के पास थी। इस बार आधी से कम होने की स्थिति हे।
भोपाल। नर्मदा ज़ोन में बीजेपी दिखायी दे रही हे सीटें बरकरार रखना भाजपा के लिए चुनौतीभोपाल जोन की 25 सीटों में से इस बार कांग्रेस की सीटें बढ़ सकती हैं। पिछले चुनाव में भाजपा ने 18, कांग्रेस ने 6 और भाजश ने एक सीट जीती थी। भाजश का बाद में विलय होने के कारण भाजपा की सीटें बढ़कर 19 हो गई थीं। इस बार एंटी इनकंबेंसी और बरसों पुराने चेहरे दोहराने के कारण भाजपा को नुकसान हो सकता है। ताजा अनुमान के अनुसार जोन में भाजपा का 13 और कांग्रेस का 11 सीटों पर माहौल है।
भोपाल : सात में से 4 सीटों पर कांग्रेस मजबूत दिखाई दे रही है। भाजपा की तीन सीटें तो पक्की हैं .
सीहोर जिला : पिछले चुनाव में यहां की चारों सीटें भाजपा के खाते में गई थीं। इस बार दो सीटें तो भाजपा की ओर झुकी हुई हैं लेकिन दो अन्य सीटों पर फिलहाल असमंजस है। जिले में कांग्रेस का खाता खुल सकता है। एक सीट पर निर्दलीय भारी है।
विदिशा : पांचों सीटें पिछले चुनाव में भाजपा की थी। इस बार चार पर तो भाजपा मजबूत है। लेकिन एक सीट पर मतदाताओं का कांग्रेस प्रत्याशी की ओर झुकाव ज्यादा दिखाई दे रहा है।
रायसेन : जिले में भाजपा की स्थिति कमजोर दिखाई दे रही है। चार सीटों में से फिलहाल सिर्फ एक सीट पर ही भाजपा मजबूत है। दो सीटों पर कांग्रेस की ओर झुकाव है। एक सीट पर मुकाबला कड़ा है। उम्मीदवारों के पक्ष में सबसे ज्यादा नेता और अभिनेता इसी जिले में प्रचार करते देखे गए।
राजगढ़ : इस जिले में पिछले चुनाव में यहां से भाजपा के दो उम्मीदवार जीते थे। कांग्रेस को दो सीटों से अधिक मिल सकती हे भाजपा ने यहां सभी जातियों को साधने की कोशिश की जबकि कांग्रेस ने दो बड़ी जातियों के दावेदारों को टिकट दिए।
ग्वालियर।ग्वालियर-चंबल जोन में कांग्रेस बसपा ने मुकाबला त्रिकोणीय किया
ग्वालियर के चार जिलों की 20 सीटों में से 12 पर कांग्रेस तो 5 पर भाजपा और तीन पर बसपा का माहौल है। हालांकि पांच सीटों पर त्रिकोणीय संघर्ष है।
ग्वालियर : छह सीटों में से पिछली बार कांग्रेस तीन और भाजपा दो पर थी। एक सीट बसपा को मिली थी। इस बार कांग्रेस एक सीट से बढ़त लेती दिख रही है।
मुरैना : छह सीटों में पिछली बार भाजपा, कांग्रेस और बसपा की दो-दो सीटें थीं। इस बार भी ऐसी ही संभावना है।
भिण्ड : जिले में बसपा का खाता खुल सकता है। भिण्ड सीट पर त्रिकोणीय संघर्ष है। 2008 में यहां कांग्रेस तीन और भाजपा दो सीटों पर थी। कांग्रेस बढ़त ले सकती है।
दतिया : जिले की तीन सीटों में एक पर कड़ा मुकाबला होने के साथ ही दो पर मामला उलझा हुआ है। दतिया सीट से नरोत्तम मिश्रा की कांग्रेस के राजेंद्र भारती से टक्कर है। इस बार भांडेर और सेंवढ़ा सीट पर भी मामला उलझा है।





















