भोपाल। मध्यप्रदेश में सभी 230 विधानसभा सीटों के लिए 25 नवंबर को होने वाले चुनाव के मद्देनजर सबने अपनी बात कह दी, मतदाता ने भी सबकी बात सुन भी ली. अब मतदाता फिर भाजपा फिर शिवराज को पसंद करगे या सबकी यही पुकार कांग्रेस इस बार को अपनायेगे इस का गणित न तो कीवोटेर्स को समझ में आ रहा हे ना ही चुनावी आकलन में लगे राजनीतिक पंडितो को , सब और मतदाता के इस अस्पस्ट रुख को देख भ्रम का माहोल हे इससे दोनों प्रमुख पार्टियो के दिग्गज भी पूरी ताकत से बड़ी बड़ी घोषनाए कर भी स्वयं आश्वस्त नहीं , बीजेपी जहा शिवराज के नाम पर तीसरी बार सत्ता के सिंहासन में बेठेने के लिए जी जान से जुटी हे, वहीं कांग्रेस ज्योतिरादित्य दिग्गी कमलनाथ भूरिया पचोरी की टीम के सहारे अपने अपने प्रभाव क्षेत्र में दस वर्षो की कमियों को उजागर कर सबकी यही पुकार कांग्रेस इस बार मतदाता के जेहन में उतारने के लिए टूट पड़े हे , कोई जाति के आधार पर, कोई कार्यो के आधार पर अपने को जीता मान रहा हे तो कोई विचारधारा के ही आसरे हे , जब तक चुनावी प्रक्रिया से अपराधियों को सख्ती से बाहर नहीं किया जाता और नोटा याने किसी को वोट नहीं का कानूनी सार्थक परिणाम नहीं निकलता तब तक उपलब्ध में से ही अधिक बेहतर अधिक उपयोगी, या कहे कि कम हानिकारक समीकरण को चुनने के लिए मतदाता अपने हितो का विश्लेषण कर निर्णय लेगा.






















