दिल्ली.प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने कहा कि हमारी जटिल सुरक्षा चुनौतियों के लिहाज से निर्णय लेने में उच्च रक्षा प्रबंधन और उचित सैन्य-असैन्य संतुलन के लिए सही ढांचा स्थापित करने में तत्काल और वास्तविक प्रगति हुई है.सेना,वायुसेना और नौसेना के शीर्ष कमांडरों को दिल्ली में संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में सशस्त्र बलों की क्षमताओं को उन्नत बनाने की जरूरत बताई जिसके लिए उन्होंने निजी क्षेत्र की सहभागिता की वकालत की.
प्रधानमंत्री ने साफ तौर पर कहा कि भारत में राजनीतिक नेतृत्व देश की सेना पर और लोकतांत्रिक रूपरेखा के साथ संस्थागत ईमानदारी पर सबसे ज्यादा आस्था रखता है.उन्होंने कहा, ‘‘आने वाले हफ्तों और महीनों में हमारी सुरक्षा चुनौतियां जटिल रहेंगी लेकिन हमारा संकल्प भी अडिग रहना चाहिए. मुझे विश्वास है कि हमारी सशस्त्र सेनाएं देश और उसके ध्वज के प्रति पूरे उत्साह और जज्बे के साथ सामूहिक जिम्मेदारी अदा करेंगे.’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं आपको इसे सर्वोच्च पेशेवर विचार के तौर पर अपनाने, अलग अलग सेवाओं के बीच मौजूदा मतभेदों में तालमेल लाने और भविष्य के लिए खाका तैयार करने के लिहाज से प्रोत्साहित करता हूं. मैं आपको विश्वास दिला सकता हूं कि राजनीतिक नेतृत्व आपकी सिफारिशों पर सर्वाधिक सावधानीपूर्ण तरीके से विचार करेगा.’’
वैश्विक माहौल का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा कि आर्थिक पेंडुलम के अनवरत रूप से पश्चिम से पूर्व की ओर झूलने की बात हमारे पूर्व में समुद्र क्षेत्रों में बढ़ते विवाद से स्पष्ट हो सकती है.उन्होंने कहा,‘‘मेरे विचार से यह घटनाक्रम अनिश्चितता से भरा हुआ है. हमें नहीं पता कि ये आर्थिक और रणनीतिक बदलाव शांतिपूर्ण होंगे या नहीं लेकिन इसी चुनौती को संस्थागत तरीके से लिया जाना चाहिए.’’
सिंह ने कहा कि वैश्वीकरण ने सुरक्षा क्षेत्र में स्पर्धा और शत्रुता को बढ़ाया है और इस विरोधाभास से निपटना भी हमारे लिए नीतिगत अनिवार्यता है. अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी द्वारा शुरू किये गये वैश्विक निगरानी अभियान से यह बात साफ होती है.
पड़ोसी देशों के हालात पर प्रधानमंत्री ने कहा,‘‘इस बात में कोई संदेह नहीं है कि हम विकट चुनौतियों का सामना करते रहेंगे.’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा पश्चिम एशिया में लगातार उहापोह की स्थिति न केवल हमारी ऊर्जा सुरक्षा और आजीविका तथा 70 लाख भारतीयों की सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है बल्कि हम तक पहुंच बनाने वाले चरमपंथ, आतंकवाद, शस्त्र प्रसार और जातीय संघर्ष के लिहाज से भी गंभीर हो सकती है.’
प्रधानमंत्री के मुताबिक एशिया प्रशांत क्षेत्र हमारे देश के लिए अहमियत रखता है क्योंकि यह बड़ी महाशक्तियों के रख को तय करने का क्षेत्र बन सकता है.चुनौतियों से निपटने के तरीकों के बारे में प्रधानमंत्री ने रक्षा मंत्रालय, सशस्त्र बलों और डीआरडीओ से अनुरोध किया कि अलग अलग कार्यबलों की रिपोर्ट की तत्काल समीक्षा की जाए.
उन्होंने कहा, ‘‘हमें एक घरेलू रक्षा औद्योगिक आधार बनाने के लिए एक अनुकूल अंतरराष्ट्रीय माहौल बनाने का फायदा भी उठाना चाहिए.’’
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में 18 नाविकों को श्रद्धांजलि दी जिनकी आईएनएस सिंधुरक्षक की दुर्घटना में जान चली गयी थी. उन्होंने उत्तराखंड में राहत अभियान के दौरान मारे गये पायलटों और लोगों को भी श्रद्धांजलि दी






















