नईदिल्ली.निवेशकों के 20 हजार करोड़ रुपये नहीं लोटने के मामले में सुप्रीम कोर्ट आदेश की लगातार अनदेखी पर सहारा समूह की टालमटोल और कानून से खिलवाड़ पर शीर्ष अदालत ने सख्ती करते हुये कहा कि हर प्रकार के विवादों से मुक्त 20 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिकाना हक के दस्तावेज सेबी को सौंपने के उसके आदेश का सहारा समूह ने ‘अक्षरश:’ पालन नहीं किया है, कोर्ट ने इसके साथ ही सुब्रत राय और समूह के अन्य निदेशकों वंदना भार्गव, रवि शंकर दुबे तथा अशोक राय चौधरी के देश से बाहर जाने पर प्रतिबंध लगा दिया.
न्यायमूर्ति के एस राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति जे एस खेहड़ की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि समूह की किसी भी संपत्ति की न्यायालय की अनुमति के बगैर बिक्री नहीं की जायेगी. इस मामले की सुनवाई के दौरान सुबत राय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सी ए सुन्दरम ने न्यायालय के आदेश पर अमल के बारे में न्यायाधीशों को संतुष्ट करने का अंतिम प्रयास किया लेकिन सेबी ने उनकी सभी दलीलों को ध्वस्त कर दिया. सेबी ने कहा कि सहारा समूह ने अपनी संपत्ति का अधिक मूल्यांकन किया है और उसने 20 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिकाना हक से संबंधित मूल दस्तावेज नहीं सौंपे हैं.
सेबी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविन्द दात्तार ने न्यायालय को सूचित किया कि वर्सोवा में 106 एकड़ भूमि का मूल्यांकन 19000 करोड़ रुपये किया गया है जबकि इसकी आधिकारिक कीमत 118.42 करोड़ रुपये ही है. उन्होंने कहा कि इस भूमि का किसी भी तरह से उपयोग नहीं किया जा सकता है क्योंकि यह हरित क्षेत्र में आती है.
न्यायाधीश उनके इस कथन से सहमत थे कि इस तरह के मूल्यांकन को स्वीकार नहीं किया जा सकता है. कोर्ट ने दात्तार से कहा कि सहारा समूह की दूसरी संपत्तियों का पता लगाया जाये जिनका 20 हजार करोड़ रुपये की जमानत के रूप में विचार किया जा सके.कोर्ट ने सहारा समूह को निर्देश दिया कि 20 हजार करोड़ रुपये की संपत्तियों के मालिकाना हक के दस्तावेज तीन सप्ताह के भीतर सेबी को सौंपे जायें. इस बीच, न्यायालय ने राय के देश से बाहर जाने पर रोक लगाते हुये इस मामले की सुनवाई 11 दिसंबर तक के लिये स्थगित कर दी.
बाजार नियामक सेबी ने न्यायालय से अनुरोध किया कि उसके निर्देशों पर अमल करने में विफल रहने के कारण सुब्रत राय का पासपोर्ट जब्त किया जाये.न्यायालय ने 28 अक्टूबर को इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुये कहा था कि वह ‘लुका छिपी’ का खेल खेल रहे हैं और उन पर अधिक भरोसा नहीं किया जा सकता है.न्यायालय ने आगाह किया था कि उसके आदेश पर संतोषप्रद तरीके से अमल नहीं किया गया तो फिर सुब्रत राय भारत से बाहर नहीं जा सकेंगे. न्यायालय ने स्पस्ट कहा था कि वह निवेशकों का धन सेबी को लौटाने से बच नहीं सकता है. न्यायालय ने सहारा समूह से अपनी संपत्तियों के मूल्यांकन की रिपोर्ट भी सेबी को सौंपने का निर्देश दिया था.





















