नई दिल्ली। बड़े वकील और अपने अजीब तर्कों से सम्मानीय न्याय प्रणाली को भी अप्रिय स्थिति में लाने वाले आप नेता प्रशांत भूषण ने कोयला ब्लॉक आवंटन मामले की सुनवाई पर ही सवाल खड़े कर दिए थे कि एंटार्नी जनरल वाहनवती ने न्यायालय से यह झूठ कहा था, कि उन्होंने हलफनामा दायर करने से पहले उसे नहीं पढा था , इसके बावजूद शीर्षस्थ अदालत ने एंटार्नी जनरल के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की।
न्यायमूर्ति आर एम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ ने एक पत्रिका में प्रकाशित प्रशांत भूषण के साक्षात्कार का संज्ञान लेते हुए इस मामले की सुनवाई कराने का निर्णय लिया था। शीर्षस्थ अदालत ने प्रशांत भूषण के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि कोई व्यक्ति, खासकर आप जैसा व्यक्ति इस तरह की बात कैसे कर सकता है।
कोलगेट मामले से जुड़े अन्य पक्षों के वकीलों ने इस आपतिजनक बयान पर भूषण के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। प्रशांत ने खंडपीठ से कहा कि उनका इरादा न्यायालय की गरिमा को गिराना नहीं था,यदि उनके किसी बयान से किसी को भी ठेस पहुंची है। तो वह इसके लिए खेद जताते हैं। इसके बाद न्यायालय ने मामले को बंद कर दिया।





















