
प्रधानमंत्री कार्यालय ने शनिवार को प्रख्यात वैज्ञानिक प्रोफेसर चिंतामणि नागेश्वर रामचंद्र राव तथा महान क्रिकेट खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर को देश के सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने की घोषणा की
शनिवार को ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने वाले तेंदुलकर यह सम्मान पाने वाले पहले खिलाड़ी हैं। पीएमओ ने तेंदुलकर को जीवित किंवदंती बताया,जो देश के करोड़ों लोगों के प्रेरणास्रोत बने। पीएमओ द्वारा जारी वक्तव्य के अनुसार 16 वर्ष की आयु में खेलना शुरू करने वाले तेंदुलकर ने पिछले 24 वर्षों में पूरी दुनिया में क्रिकेट खेलकर देश को अनेक गौरवों से नवाजा। वक्तव्य में आगे कहा गया है कि वह (तेंदुलकर) खेलों में भारत के सच्चे दूत रहे। क्रिकेट में उनकी उपलब्धियां अतुलनीय हैं। उन्होंने जो कीर्तिमान स्थापित किए वे अद्वितीय हैं तथा जिस खेल भावना का परिचय उन्होंने दिया वह अनुकरणीय है।
पीएमओ ने अपने वक्तव्य में आगे कहा कि तेंदुलकर को अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं, जो एक खिलाड़ी के रूप में उनकी असाधारण प्रतिभा का परिचायक है। विश्व के महानतम बल्लेबाजों में शुमार तेंदुलकर ने शनिवार को वेस्टइंडीज के साथ मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में अपने 200वें टेस्ट मैच के साथ ही क्रिकेट को अलविदा कह दिया।
प्रोफेसर राव ने मंगल अभियान के माध्यम से भारत को अंतरिक्ष विज्ञान में आकाश की अनंत बुलंदी तक पहुंचाया। विज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए सरकार ने उन्हें इस सम्मान से नवाजने का फैसला किया है
सीएनआर राव सोलिड स्टेट और मैटीरियल केमिस्ट्री के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यताप्राप्त वैज्ञानिक हैं। उनके 1400 शोध पत्र और 45 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। दुनियाभर के तमाम प्रमुख वैज्ञानिक शोध संस्थानों ने राव के योगदानों का महत्वपूर्ण बताते हुए उन्हें अपने संस्थान की सदस्यता के साथ ही फेलोशिप भी दी है। उन्हें कई सारे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुके हैं।
इस समय वह भारत के प्रधानमंत्री की वैज्ञानिक सलाहकार परिषद के प्रमुख हैं। सबसे कम उम्र में भारत रत्न घोषित किए जाने वाले 40 साल के सचिन ने यदि क्रिकेट में 100 शतकों का रिकॉर्ड कायम किया है तो 79 साल के राव ने भी इस साल अप्रैल में 100 के एच-इंडेक्स (शोधकर्ता की वैज्ञानिक उत्पादकता एवं प्रभाव का वर्णन करने का जरिया) तक पहुंचने वाले पहले भारतीय होने का गौरव हासिल किया। राव की इस उपलब्धि से पता चलता है कि उनके प्रकाशित शोध कार्यों का दायरा कितना व्यापक है।
राव की इस उपलब्धि का मतलब समझाते हुए कुछ वैज्ञानिक कहते हैं कि उन्होंने जो मुकाम हासिल किया, दरअसल वह सचिन के 100 शतकों की उपलब्धि से किसी भी मायने में कम नहीं है।
भारतीय प्रधानमंत्री की वैज्ञानिक सलाहकार परिषद के प्रमुख के तौर पर काम कर रहे राव के पांच दशकों से ज्यादा के करियर में उनके 1,500 शोध-पत्र प्रकाशित हो चुके हैं । वह ऐसे चुनिंदा वैज्ञानिकों में हैं जो दुनिया की सभी बड़ी वैज्ञानिक अकादमियों के सदस्य हैं।
एच-इंडेक्स के बारे में सबसे पहले 2005 में भौतिकीविद जॉर्ज हिर्श ने बताया था। किसी वैज्ञानिक का एच-इंडेक्स उसके द्वारा प्रकाशित ऐसे शोध पत्रों की सर्वाधिक संख्या है जिनमें से हर एक पत्र को कम से कम उतनी प्रशस्ति मिली हो।























