रूस के निर्माण केंद्र सेवमेश शिपयार्ड में परमाणु पनडुब्बी युक्त विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य अर्थात सूर्य सामान तेजस्वी योद्धा ,पूर्व कीव श्रेणी के विमानवाही पोत (पूर्व नाम एडमिरल गोर्शकोव) को भारत को सौंपे जाने के समारोह,रूस के सेवेराद्विन्स्क बंदरगाह में होगा में रूसी प्रधानमंत्री दमित्रि रोगोजिन, भारत के रक्षा मंत्री एके अंटोनी तथा दोनों देशों की सरकारों एवं नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी की मौजूदगी में भारतीय नौसेना में शामिल किया जावेगा, एंटनी इस समारोह में युद्धपोत पर तिरंगा फहराएंगे.
आईएनएस विक्रमादित्य पोत की परियोजना 114430 के तहत 2.3 अरब डालर अर्थात 14560 करोड़ रु की लागत पर उन्नयन किया गया है.45 हजार टन वजनी युद्धपोत एक तरह से तैरता हुआ शहर हे जिस पर हवाई अड्डा 284 मीटर लंबा और 60 मीटर चौड़ा है जो तीन फुटबॉल मैदान के बराबर हे , यह युद्धपोत 20 मंजिला इमारत जितना ऊंचा है , 22 छतें हैं। इस पर 1,608 नौसैनिक होंगे। इनके लिए 16 टन चावल, एक लाख अंडे, 20 हजार लीटर दूध आवश्यक होगा। विक्रमादित्य लगातार 45 दिन समुद्र में रह सकता है। इसकी क्षमता आठ हजार टन ईंधन की है। इसके हवाई अड्डे से सात हजार समुद्री मील या 13,000 किमी तक अभियान चलाया जा सकता है,यानी इस जहाज की छत से उड़े लड़ाकू विमान अमेरिका तक तबाही मचा सकते हैं।
करीब नौ सालों की बातचीत के बाद पोत में पुराने पुर्जे हटाकर नये लगाने तथा 16 मिग.29, के:यूबी डेक आधारित लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए वर्ष 2004 में 1.5 अरब डालर का शुरूआती अनुबंध हुआ. 1998 में गतिरोध समाप्त करने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री येवगेनी प्रिमाकोव की सरकार ने भारत को मुफ्त में देने की पेशकश की थी बशर्ते वह इसकी मरम्मत और आधुनिकीकरण का खर्चा दे दे.
सौदा द्विपक्षीय संबंधों में एक बड़ी अड़चन बन गया था. वर्ष 2007 के अंत तक दोनों देशों के बीच संबंध गिरकर सबसे निचले स्तर पर पहुंच गये थे, जब यह स्पष्ट हो गया था कि रूस पोत की आपूर्ति वर्ष 2008 की समयसीमा तक नहीं करेगा. यद्यपि कार्य के प्रारंभिक मूल्यांकन में जरूरी परिश्रम की कमी के चलते उसकी कीमत काफी बढ़ गई जिससे उसकी मरम्मत और आधुनिकीकरण का काम रूक गया था.भारतीय अधिकारियों ने स्वीकार किया कि बढ़ी कीमत के बावजूद यह एक अच्छा सौदा होगा क्योंकि उसकी तरह का पोत अंतरराष्ट्रीय बाजार में दोगुनी से कम कीमत पर नहीं मिलेगा लेकिन कोई भी विमानवाहक पोत निर्यात के लिए नहीं बनाता.
सेवमेश शिपयार्ड के चीफ डिलीवरी कमिश्नर इगोर लियोनोव ने कहा,‘विक्रमादित्य पर लगभग सभी चीज नयी है.’ लियोनाव ने सेवमेश के जेट्टी पर कहा कि पोत का करीब 40 प्रतिशत पेंदा मूल वाला है बाकी पूरी तरह से नया है,‘नौसेना ने पोत की मरम्मत और आधुनिकीकरण की पूरी प्रक्रिया के दौरान अपने इंजीनियरों और तकनीशियनों को पोत पर तैनात किये रखा, नौसेना ने कई उपकरणों, पुजरें और पूरी केबलिंग की मरम्मत करने की बजाय उसे बदलने का सही निर्णय किया.’लियोनोव विक्रमादित्य की भारत में पश्चिमी तट स्थित करवार स्थित आधार पोत केंद्र पर पहुंचाने के लिए लगभग दो महीने की यात्रा के दौरान उस पर तैनात सुरक्षा संरक्षा गारंटी टीम का नेतृत्व करेंगे.























