सुप्रीम कोर्ट संवैधानिक पीठ ने मंगलवार को कहा कि पुलिस के लिए यह अनिवार्य होगा कि वह थाने में आने वाले हर संज्ञेय अपराध की एफआईआर दर्ज करे
सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी सदाशिवम, न्यायाधीश बी एस चौहान, न्यायाधीश रंजन पी देसाई, न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायाधीश एस ए बोब्दे की संवैधानिक पीठ ने महत्वपूर्ण न्यायादेश में कहा कि यदि कोई पुलिस अधिकारी किसी भी संज्ञेय अपराध की प्रथम सूचना रिपोर्ट ( एफआईआर ) दर्ज करने में असफल पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी,संज्ञेय अपराधों की श्रेणी में ऐसे अपराध आते हैं, जिनके लिए अपराधी को तीन साल या उससे अधिक की सजा दी जा सकती है और जांचकर्ता अधिकारी आरोपी को बिना वारंट भी गिरफ्तार कर सकते हैं, संवैधानिक पीठ ने कहा कि अन्य मामलों में यह पता लगाने के लिए प्रारंभिक जांच की जा सकती है कि वह संज्ञेय अपराध है या नहीं और इस प्रकार की जांच सात दिन के भीतर पूरी हो जानी चाहिए।
सर्वोच्च न्यायालय की संवैधानिक पीठ ने कहा कि कानून में कोई अस्पष्टता नहीं है और कानून की मंशा संज्ञेय अपराधों में अनिवार्य एफआईआर पंजीकरण की है। संवैधानिक पीठ ने तीन जजों की पीठ द्वारा मामले को वृहतर पीठ के पास भेजे जाने के बाद यह फैसला दिया गया। तीन जजों की पीठ ने इस आधार पर मामले को वृहतर पीठ के पास भेजा था कि इस मुद्दे पर विरोधाभासी फैसले हो गए थे ।






















