कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) ने प्याज की कीमतों में स्थिरता के लिए सरकार से दीर्घकालीन बाजार हस्तक्षेप योजना बनाने का आग्रह किया है। सीएसीपी के चेयरमैन डॉ. अशोक गुलाटी ने कहा, ‘बाजार में हस्तक्षेप और प्याज सहित किसी भी जिंस की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार के पास दो तरीके हैं। प्याज उत्पादन के आधार पर सरकार को निश्चित मात्रा का बफर स्टॉक बनाए। यह हाइड्रोजेनेट प्याज होना चाहिए और इसे कमजोर आवक के सीजन में बाजार कीमतों से कम पर बेचना चाहिए।
बफर स्टॉक से मोटे मुनाफे के लिए जमाखोरी करने वाले कारोबारियों में भय पैदा होता है। ऐसा अनाज और चीनी सहित अन्य जिंसों में देखा भी गया है। कमजोर सीजन में ऊंची कीमतों पर बेचने के लिए स्टॉक करने वाले कारोबारी ऐसा करने से डरेंगे, जिससे कीमतें सीमित दायरे में रहेंगी। इससे सरकारी एजेंसियों को कारोबारियों पर बढ़त मिलेगी।
खाद्य मंत्री केवी थॉमस ने आज कहा कि घरेलू और आयातित प्याज भंडार की ताजा आवक होने पर अगले 10 दिन में प्याज की कीमत नीचे आ जायेगी। किसानों को उपयुक्त कीमत मिलनी चाहिये और उपभोक्ताओं को सस्ते में प्याज उपलब्ध होना चाहिये। उन्होंने व्यापारियों से भी कहा कि वे अधिक कीमत वसूल कर उपभोक्ताओं को न लूटें।
देश के बड़े शहरो में प्याज की कीमत 70 से 90 रुपए किलो तक बोली जा रही है जबकि प्याज उत्पादको को अभी भी 20 से 40 रु से ज्यादा नहीं मिल रहा रहा । पटना व जम्मू जैसे कुछ शहरों में तो इसका दाम 100 रपए किलो तक बोला जा रहा है। थॉमस ने कहा कि इस स्थिति से घबराने की कोई जरूरत नहीं है। सहकारी संस्था नाफेड द्वारा प्याज आयात संबंधी बोली पर फैसला 29 अक्टूबर को लिया जाएगा। इसके तीन-चार दिन बाद प्याज की खेप आएगी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकारों को जमाखोरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिये और कुछ राज्यों ने पहले ही कार्रवाई की हुई है। थॉमस ने कहा कि उन्होंने आपूर्ति स्थिति को लेकर महाराष्ट्र, राजस्थान और कर्नाटक सरकार से विचार विमर्श किया है और प्याज की आवक में सुधार हो रहा है।






















