नार्वे का जुकान कस्बा। सर्दियों के सात महीनों में दिन में भी सूरज की रोशनी नहीं। दिन मानो रात जैसे। सितंबर से मार्च तक चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा। कोई 100 साल पहले कस्बे को बसाने वाले सैम ईड ने सूरज की रोशनी को कस्बे में उतारने के बारे में सोचा था। तभी से प्रयास जारी थे। दिन में इसी की तरह घुप अंधेरे में लिपटे रहने वाले इटली के एक कस्बे में लोगों ने सूरज की रोशनी को जमीं पर उतार कर दिखा दिया। उसी प्रोजेक्ट पर काम करते हुए यहां की जमीं पर भी सूरज की रोशनी के पांव टिका दिए गए हैं।






















