दुनिया के सभी देशों में सेना की नौकरी को सबसे ज्यादा सम्मानीय, खतरों से भरी और अच्छी तनख्वाह दी जाती है। पुरुषों के इस क्षेत्र में प्रभुत्व करने के बाद अब महिलाएं भी तेजी से इसे अपना रही हैं और दुश्मनों से लोहा ले रही हैं।
हालांकि पुरुषो द्वारा महिलाओं को सेना में पहले पचाना मुश्किल होता है लेकिन भारत में 1857 की क्रांति में पहली बार झांसी की रानी लक्ष्मी बाई ने अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध किया था, रानी अवंतिबाई का नाम भी योद्धाओं में शामिल हे ।महिलाओं के सेना में काम करने की इतिहास पहली बार प्रथम विश्व युद्ध में दिखाई देता है। इसकी शुरुआत रूस ने व्यापक रूप से की थी। द्वितीय विश्वयुद्ध में प्रमुख देशों में महिलाओं को सेना की वर्दी पहनाई गई थी, लेकिन उस दौर में उनका काम भी नर्सिग और ऑफिस वर्क तक सीमित था। करीब 5 लाख महिलाओं को ब्रिटेन और जर्मनी की ओर से एंटी एयरक्राफ्ट यूनिट का हिस्सा बनाया, जबकि रूस में यह फ्रंट लाइन यूनिट में थीं।
इजरायल दुनिया का एकमात्र ऐसा मुल्क है, जहां महिलाओं को अनिवार्य रूप से सैन्य सेवा में काम करना होता है। यह अनिवार्यता सिंगल और विवाहित महिला पर लागू होती है।






















