चीन ने कथित रूप से एक नई मिसाइल का टेस्ट किया है। ये मिसाइल 10 न्यूक्लियर वॉरहेड्स ले जाने में कैपेबल है। माना जा रहा है कि चीन ने ये टेस्ट डोनाल्ड ट्रम्प को ताकत दिखाने के लिए किया है।अमेरिका चीन पर नजर रख रहा है.इस बात की संभावना ज्यादा है कि अमेरिका-चीन के बीच जंग ज्यादा तेज होगी।’
‘वॉशिंगटन फ्री बेकन’की रिपोर्ट के मुताबिक,’चीन ने पिछले महीने DF-5(दोंगफेंग)मिसाइल का टेस्ट किया। इसके लिए 10 मल्टीपल टार्गेटेबल व्हीकल का इस्तेमाल किया गया।’
-‘टेस्ट के लिए नकली वॉरहेड्स लगाए गए।’रिपोर्ट से जुड़े दो अफसरों ने ये बात बताई।
-‘DF-5 मिसाइल 10 डमी वॉरहेड्स को लेकर गई। मिसाइल को शांसी प्रॉविंस स्थित ताईयुआन स्पेस लॉन्च सेंटर से लॉन्च किया गया।’
-‘ये मिसाइल DF-5 का ही नया वर्जन है। इस इंटरकॉन्टीनेंटल बैलिस्टक मिसाइल को 1980 के दशक में लाया गया था।’
दक्षिण चीन सागर को लेकर भारत, अमेरिका के साथ चीन के विवाद के बीच वामपंथी देश ने अपनी इंटरकॉन्टिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल का परीक्षण कर दुनिया को हैरत में डाल दिया है। डीएफ-41 नाम की ये मिसाइल महज आधे घंटे में 14,000 किलोमीटर तक मार कर सकती है। इसका मतलब ये है कि ये मिसाइल आधे घंटे में दुनिया के किसी भी कोने में पहुंच सकती है। मिसाइल की रेंज इतनी ज्यादा है कि ये यूरोप से लेकर यूएस के किसी भी शहर को निशाना बना सकती है।
चीन दक्षिणी सागर में कृत्रिम आइलैंड भी बना रहा है। इसके बीच चीन का ये कदम चिंताएं बढ़ाने वाला है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक डीएफ-41 मिसाइल का परीक्षण बीते मंगलवार को दो मल्टिपल, इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल वीइकल से किया गया। चीन के इस परीक्षण को इसलिए बड़ा खतरा माना जा रहा है, क्योंकि डीएफ-41 किसी दूसरी इंटर-कॉन्टिनेंटल मिसाइल और सबमरीन लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल जेएल-2 से कई गुना ज्यादा पावरफुल है।
‘वॉशिंगटन फ्री बीकन’ नाम की वेबसाइट के हवाले से बताया कि अमेरिकन सैटेलाइट्स और रीजनल सेंसर्स ने मिसाइल टेस्ट के दौरान न्यूक्लियर वॉरहेड्स डिटेक्ट किए हैं। यूएस स्ट्रैटिजिक कमांड के कमांडर ऐडमिरल सेसिल हैने ने 22 जनवरी को कहा था कि चीन परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम अपनी लंबी दूरी की बैलेस्टिक मिसाइल को री-इंजीनियर कर रहा है। ‘फ्री बीकन’ ने दक्षिण चीन सागर के हालात का वर्णन किया और पेंटागन के हवाले से जोड़ा कि चीन विवादास्पद आइलैंड में मिलिटरी बेस बना रहा है। हालांकि बीजिंग वॉशिंगटन को निशाने पर लेते हुए अक्सर दावे करता है कि वह वॉरशिप की तैनाती कर रहा है और क्षेत्रीय गठबंधन भी कर रहा है।
चीन की ये नई मिसाइल एक सामरिक खतरे के रूप में देखी जा रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह बाकी रोड मिसाइल ICBM और JL-2 पनडुब्बी से कहीं ज्यादा बड़ी है। ‘फ्री बीकन’ ने आगे जोड़ा कि मिसाइल 10 वारहेड्स को ले जा सकती है। रक्षा अधिकारियों ने ‘फ्री बीकन’ को बताया कि यह परीक्षण चीन के परमाणु शस्त्रागार को बड़े पैमाने पर विकसित करने की योजना का ही हिस्सा है। लेकिन सबसे भयानक ये है कि चीन और रूस साथ मिलकर अपनी मिलिट्री ताकत को अमेरिका के खिलाफ विकसित कर रहे हैं। उत्तर कोरिया और ईरान को परमाणु मिसाइल संपन्न देश बनाने की चीन की योजना भी पूरी होने को है।
पेंटागन के अफसर
-अमेरिकी डिफेंस डिपार्टमेंट के स्पोक्सपर्सन कमांडर गैरी रॉस के मुताबिक,”हम चीन के मिलिट्री डेवलपमेंट्स और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी(पीएलए)की कैपेबिलिटी पर लगातार नजर रख रहे हैं। ये हमारे डिफेंस प्लान का हिस्सा है।”
-अमेरिका का मुताबिक,चीन के पास करीब 250 न्यूक्लियर वॉरहेड्स हैं।
-रिपोर्ट के मुताबिक,10 डमी वॉरहेड्स की बात सामने आई है। इसका मतलब है कि सही संख्या कहीं ज्यादा हो सकती है।
-यूएस इंटेलिजेंस एजेंसीज की मानें तो चीन ने DF-5 के वॉरहेड्स ले जाने की प्रोसेस पिछले साल फरवरी में ही शुरू कर दी थी।
-इससे पहले भी अमेरिका,चीन को उसके डिफेंस प्रोग्राम(लॉन्ग रेंज मिसाइल)में ट्रांसपेरेंसी न बरतने को लेकर वॉर्निंग देता रहा है।
इस वक्त टेस्ट करने का क्या मकसद
-हाल ही में ट्रम्प यूएस प्रेसिडेंट बने हैं। कैम्पेन के दौरान से ही वे चीन को लेकर तल्ख रवैया दिखाते रहे हैं।
-साउथ चाइना सी को लेकर भी अमेरिका कह चुका है कि उसपर किसी एक देश का हक नहीं हैं। वहां अंतरराष्ट्रीय हितों की रक्षा की जाएगी।
-इस पर चीन ने कहा था कि पूरे साउथ चाइना सी विवाद में यूएस का तो लेना-देना ही नहीं है। उसे मामले से दूर रहना चाहिए।
-वहीं चीन के मिलिट्री एक्सपर्ट के मुताबिक,टेस्ट का मकसद ट्रम्प को ताकत दिखाना नहीं है।
-“टेस्ट के लिए सेंट्रल मिलिट्री कमीशन मंजूरी दे चुका था। अभी इसे एक साल मिलिट्री अप्रूवल लेने और बाकी तैयारियों में लगेगा।”
PLA की वेबसाइट में चीन-अमेरिका में तल्खी
-पीएलए की ऑफिशियल वेबसाइट में चीन-अमेरिका रिलेशन को लेकर काफी तल्खी दिखती है।
-20 जनवरी को ट्रम्प के शपथ लेने के दिन लिखा गया,’एशिया-पैसिफिक में स्थितियां काफी जटिल हो गई हैं।
-यह भी लिखा गया,’प्रेसिडेंट ट्रम्प के कार्यकाल में जंग की केवल बातें नहीं होंगी,ये एक सच्चाई भी हो सकती है।’
-चीन की DF-41 की रेंज 14 हजार किमी है और वह 10-12 एटमी वॉरहेड्स ले जा सकने में कैपेबल है।























