देश विदेश से अनेको विश्विद्यालयो से प्रबंधन गुरु आज उज्जैन सिंहस्थ महाकुंभ महापर्व ब्रांड इवेंट के विभिन्न् आयामो का अध्ययन मनन चिंतन करने कुछ सीखने विद्यार्थियो की भांति आ रहे हे और फिर से बना रहे हे उज्जयिनी को सीट ऑफ लर्निंग ऐंड जजमेंट
महाकाल की उज्जयिनी के पवित्र क्षिप्रा तट पर, सिंहस्थ महाकुम्भ महापर्व 2016 सनातन धर्म आस्था और परंपरा का विश्व का विशालतम समागम का प्रथम शाही महा अमृत स्नान शुभारम्भ, जूना आखाड़े के नागाओं ने स्नान किया, शैव ने दत्त अखाड़ा घाट और वैष्णव अखाड़ो ने राम घाट पर अमृत लाभ लिया, विशाल साधुओ के समागम ने हर हर महादेव के जय कारो से पृथ्वी और आसमान ही गूंजा दिया, अस्त्र शाश्त्रो से युक्त इन धर्म के ध्वज्वाहको की दिव्य मनोहारी दर्शन से अवन्तिकावासी धन्य हुए।
आयोजन महामेला की समस्त तैयारियो को व्यवस्थाओ को कमिश्नर रविन्द्र पस्तौर, कलेक्टर कवीन्द्र कियावत, आईजी मधुकुमार, डीआईजी राकेश गुप्ता, एसपी मनोहर वर्मा, मेलाधिकारी अविनाश लवानिया और उनकी टीम ने सफलतापूर्ण अंतिम रूप प्रदान कर विधिवत शाही स्नान प्रारंभ कराया. मुख्य सचिव , प्रमुख सचिवो ने स्वयं सारी एक एक व्यवस्था चेक की, मुख्यमंत्री ले रहे पल पल की रिपोर्ट, सिंहस्थ क्षेत्र ही नहीं आसपास के जिले, ये कहे की प्राचीन अवंति राज्य के चंहु और चप्पे चप्पे पर शानदार अत्याधुनिक सुविधाओ से सज्जित चाकचौबंद व्यवस्था हाईटेक निगरानी करने का प्रयत्न किया हे.

अमृत महास्नान हेतु लाखो लाख की संख्या में श्रद्धालु भक्त साधू संत महंत महात्मा ज्ञानी ध्यानी और गुरुजन विश्व के इस सबसे बड़े समागम महाकुम्भ महामेले में सम्मिलित होने के लिए उमड़ पड़े हे.
जबकी ये तो पहला अमृत स्नान हे. एक दो वर्षो से देश विदेश में लगभग हर प्रकार के मीडिया में ब्रांडिंग हेतु किये गए अथक योजनाबद्ध प्रयासों से, और सरकार द्वारा मुक्त हस्त से अरबो रू व्यय कर , मेला क्षेत्र् और आसपास के नगरो में भी की गयी उपयोगी अधोसरंचनात्मक व्यवस्थाओ की माउथ पब्लिसिटी से आकर्षित हो अनेक प्रमुख साधू संतो ने नासिक कुम्भ के पश्चात् ही तैयारियों के लिए यहाँ लगातार पड़ाव करने से उज्जैन सिंहस्थ महापर्व समय से एक दो माह पूर्व ही प्रारम्भ सा हो गया.

गत कुम्भो के लगभग तीन गुने से ज्यादा में फेला, विशेषकर 14 किमी क्षिप्रा के दोनों किनारो पर स्थित घाटो से लगी 4000 हेक्टेयर भूमि मे दिव्य मनोहारी छंटा बिखेरते हजारो शिविर भगवे रंग में सराबोर भूमंडल ही नहीं आकाश को भी अवर्णीय भव्य सौंदर्य प्रदान करते दिख रहे हे।
इसके असफल होने की आशंका की समीक्षा इस बार जितनी बार हुयी, शायद उससे पहले किसी सिंहस्थ में नहीं हुयी.इससे निसंदेह प्रशासनिक नेतृत्व को अपनी व्यवस्थाओ को और बेहतर बनाने की चुनोतीया लगातार बनी हुयी हे, और यही इसकी सफलता की ऊर्जा भी हे.

सिंहस्थ महाकुम्भ महापर्व बैसे तो हर पहलू से नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा हे और स्वयं मुख्यमंत्री और प्रभारी मंत्री की भी हर निर्णय में सीधी भूमिका हे, पर शासन की इच्छाओ को स्वीकार्य ढंग से मूर्तरूप देना, प्रत्येक ऐसे उपाय करना जिससे व्यवस्था बने और शासन को यश मिले वो समझना , की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासनिक नेतृत्व की हे और इस सबके पीछे जिस व्यक्ति के सरल सादगीपूर्ण नेतृत्व में प्रत्येक उज्जैनवासी और साधू संत महंतो श्रद्धालूयो को एकमत से पूर्ण विश्वास हे, जिसने अहंकार रहित होकर तमाम बाधाओ चुनोतियो को, प्रशासनिक टीम को साथ लेकर बखूबी सफल अंजाम तक पहुँचाया, यश को दुसरो के हवाले किया, वे निर्विकार तपस्वी की भाँती एक समग्र साधक चिंतक रणनीतिकार हे कमिश्नर रविन्द्र पस्तौर , जिन्होंने समय का अभाव होने पर भी , बगैर आत्मबल खोये लगातार बेबाकी से टीम बिल्डिंग और हाईटेक प्रबंध के द्वारा वो सव क्रियान्वित कर दिखाया जिसे सब लोग लगभग असंभव समझते थे. प्रशासनिक दुनिया के लोगो तो सिंहस्थ उज्जैन के अन्तराष्ट्रिय ब्रांड बनने पर भी यकीन नहीं हो रहा हे. किन्तु आज तो सत्य और सामयिक यथार्त यही हे.
यही हे नए अत्याधुनिक प्रबंधकीय दृष्टिकोण से परंपरागत प्रशासनिक जगत को नयी ऊंचाई तक पहुचना और सनातन संस्कृति के इस महापर्व महाआयोजन के माध्यम से भारत फिर एक बार अपने विश्व गुरु स्तर के महा ज्ञान कुम्भ से दुनिया को परिचित करा रहा हे।
देश विदेश से अनेको विश्विद्यालयो से प्रबंधन गुरु आज उज्जैन सिंहस्थ महाकुंभ महापर्व ब्रांड इवेंट के विभिन्न् आयामो का अध्ययन मनन चिंतन करने कुछ सीखने विद्यार्थियो की भांति आ रहे हे और फिर से बना रहे हे उज्जयिनी को सीट ऑफ लर्निंग ऐंड जजमेंट.






















