
उज्जैन.नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की अलग-अलग तिथियों पर विधि-विधान से पूजा-उपासना की जाती है। विश्व प्रसिद्द शक्तिपीठ हरसिद्धि देवी के मंदिर समेत प्राचीन चोबीसखम्बा माँ महालाया महामाया देवी, गढ़कलिकादेवी, चामुंडा देवी, सहीत सभी देवी मंदिरों में नवरात्रि महापर्व के मेले लगे हुए हे.भक्त श्रद्धा उत्साह से व्रत उपवास साधना में व्यस्त हे .
चैत्र शुक्लपक्ष प्रतिपदा तिथि पर मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री का अभिषेक-पूजन होगा। हिमालय के यहां पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण उनका नामकरण शैलपुत्री पड़ा। इनका वाहन वृषभ है, इसलिए यह देवी वृषारूढ़ा के नाम से भी जानी जाती हैं। इस देवी ने दाएं हाथ में त्रिशूल धारण कर रखा है और बाएं हाथ में कमल सुशोभित है। यही देवी प्रथम दुर्गा हैं। पूर्व जन्म में ये प्रजापति दक्ष की कन्या थीं, तब इनका नाम सती था। इनका विवाह भगवान शंकरजी से हुआ था। प्रजापति दक्ष के यज्ञ में सती ने अपने शरीर को भस्म कर अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया। पार्वती और हैमवती भी उन्हीं के नाम हैं। उपनिषद् की एक कथा के अनुसार, इन्हीं ने हैमवती स्वरूप से देवताओं का गर्व-भंजन किया था। नव दुर्गाओं में प्रथम शैलपुत्री का महत्व और शक्तियां अनन्त हैं। नवरात्र पूजन में प्रथम दिन इन्हीं की पूजा की जाती है। इस दिन उपासना में योगी अपने मन को मूलाधार चक्र में स्थित कर साधना करते हैं।
व्रत में फल-जूस का करें सेवन
बदलते मौसम में बेहतर प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के लिए फलों व जूस का सेवन लाभदायक होगा। लिहाजा नवरात्रि के व्रत के दौरान इसके सेवन से प्रतिरोधक क्षमता तो अच्छी रहेगी ही, स्वाइन फ्लू, सामान्य फ्लू व अन्य वायरल बीमारियों का खतरा भी कम होगा। मौसम में नियमित हो रहे बदलाव के कारण प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है। वहीं, अधिकतम तापमान 30 डिग्री से कम होने से स्वाइन फ्लू, सामान्य फ्लू व अन्य बीमारियों के वायरस सक्रिय स्थिति में हो जाते हैं। इस स्थिति में व्रत के दौरान लापरवाही बीमार कर सकती है।
फिजिशियन बताते हैं कि मौसम में हो रहे बदलाव व विभिन्न बीमारियों के लिए जिम्मेदार वायरस की सक्रियता के कारण व्रतियों को विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। फलों के सेवन व ताजा जूस से शरीर को जरूरी तत्व मिलेंगे। न्यूट्रिनिस्ट अनुसार मौसम में बदलाव और विभिन्न बीमारियों के खतरे को देखते हुए लोग फलाहारी व्रत को प्राथमिकता दें। खासकर विटामिन सी प्रतिरोधक क्षमता बेहतर करने में काफी कारगर है। अगर अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन करना है तो उसमें फैट व वसा की मात्र कम हो। प्रत्येक दो घंटे पर पर फल, जूस या अन्य खाद्य पदार्थ लेना लाभकारी होगा।























