शिमला । भले ही बाजार में सोने की कीमतें आसमान छू रही हों लेकिन श्रद्धा के आगे सोने की चमक फीकी दिखती है। लोग खुले मन से देवी-देवताओं का श्रृंगार सोने-चांदी के आभूषणों से कर रहे हैं जो भगवान के प्रति लोगों की अटूट आस्था को दर्शा रहा है। इस समय में प्रदेश के विभिन्न मंदिरों में चार क्विंटल 58 किलो 363 ग्राम सोना पड़ा है। इससे कहीं अधिक चांदी का भंडार मंदिरों में है। चांदी का चढ़ावा 158 क्विंटल, 80 किलो 454 ग्राम चढ़ा है। यही नहीं, लोग खुले हाथों से भगवान को पैसों का चढ़ावा भी चढ़ा रहे हैं जिससे हर साल मंदिर में होने वाली आय बढ़ रही है जो 283 करोड़ 17 लाख के पार हो गई है। शुक्रवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक आशा कुमारी के सवाल के उत्तर में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने सदन को अवगत करवाया। मुख्यमंत्री ने यह भी आश्वस्त किया कि चंबा के लक्ष्मी नारायण मंदिर से जुड़ी जानकारी इसी सत्र के दौरान उपलब्ध करवा दी जाएगी।
मंदिरों में सोने-चांदी और आय को लेकर चर्चा हुई जिसमें सामने आया है। 15 जुलाई 2014 तक प्रदेश के विभिन्न मंदिरों में सोने-चांदी के अकूत भंडार है सबसे अधिक सोना ऊना जिला के चिंतपूर्णी मंदिर में है। इसके बाद ज्वालामुखी मंदिर के प्रति लोगों ने अपनी खूब आस्था दिखाते हुए खुलकर सोना चांदी चढ़ाई है। बिलासपुर के नयनादेवी मंदिर और हमीरपुर के बाबा बालकनाथ मंदिर के प्रति भी लोगों ने श्रद्धा दिखाते हुए जमकर सोने का चढ़ावा चढ़ाया है, चामुंडा मंदिर में भी सोने का खूब भंडार है।





















