पैदल सिपाही का बेटा लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहाग बनेगा देश का आर्मी चीफ
जिस पिता ने पूरी जिंदगी पैदल सिपाही की ड्यूटी बजाते हुए काटी, उसका बेटा 31 जुलाई को देश का आर्मी चीफ बनने जा रहा है। हरियाणा में झज्जर जिले के बिशान गांव में 84 साल के राम फल सिंह सुहाग के लिए इससे बड़ा गर्व का पल और क्या हो सकता है? राम फल सिंह का सपना था कि उनका बेटा सेना में ऑफिसर बने। 31 जुलाई को जब लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहाग देश के 26वें सेना चीफ बनेंगे तो उनके पिता राम फल सिंह अपने सपने को याद करेंगे या इस सच को देखकर आह्लादित होंगे?
18 कैवलरी रेजिमेंट से सूबेदार मेजर से रिटायर हुए राम फल सिंह ने कहा कि दो पीढ़ी से हमारे परिवार के लोगों ने सेना में जूनियर रैंक की सेवा दी। इसी दौरान मैंने फैसला किया मेरे बच्चे इस परंपरा को तोड़ेंगे और वे सेना को लीड करेंगे। मैं चाहता था कि दलबीर न केवल सेना में कमिशन्ड ऑफिसर बने बल्कि आर्मी में टॉप रैंकिंग ऑफिसर की भूमिका अदा करे।
राम फल सिंह ने कहा, ‘दलबीर की क्लास 4 तक गांव के प्राइमरी स्कूल में ही पढ़ाई हुई। इसके बाद उनका ऐडमिशन राजस्थान में चितौड़गढ़ के सैनिक स्कूल में हुआ। स्कूल में दलबीर का शानदार परफॉर्मेंस रहा। 1970 में दलबीर को नैशनल डिफेंस अकैडमी की परीक्षा निकालने में कामयाबी मिली।’ राम फल सिंह के दलबीर सिंह छोटे बेटे हैं। दलबीर सिंह के दोनों जीजा भी आर्मी में सीनियर रैंक के ऑफिसर हैं।
शुरू में बेटे दलबीर पर पूर्व सेना चीफ वीके सिंह की आपत्ति से राम फल सिंह आहत थे, लेकिन अब उन्हें भरोसा है कि उनका बेटा अपने स्टैंड पर ईमानदारी के साथ खड़ा है। दलबीर की मां ईशरी कहती हैं कि उनके बेटे के लिए यह सब इतना आसान नहीं था, लेकिन अब सबकुछ सच होते हुए दिख रहा है। परिवार के सदस्यों ने बताया कि श्रीलंका में 1987 से 1990 के बीच दलबीर ने ऑपरेशन पवन में शानदार बहादुरी का परिचय दिया था। परिवार वाले ऐसा महसूस कर रहे हैं कि इस बहादुरी का अवॉर्ड दलबीर को अब मिल रहा है।
ईशरी देवी याद करते हुए बताती हैं, ‘दलबीर को चुरमा और घर के देसी घी में बने सामान बेहद प्रिय थे। दलबीर के लिए शुद्ध दूध के लिए घर में भैंस भी पाली गई थी। जब दलबीर सिंह के फिटनेस के बारे में पूछा गया तो उनके पिता ने कहा कि हम लोग उसे दूध पिलाने पर खूब जोर देते थे। चुरमा भी वह खूब खाता था।’
उन्होंने कहा, ‘ऐसे में गांव के लोगों से भला और कौन मजबूत हो सकता है?’ पिता ने कहा कि दलबीर की पोस्टिंग कई राज्यों में होती रही लेकिन हम लोग उसे देसी घी हर जगह भेजते रहे। दलबीर सिंह की फिटनेस की चर्चा आम बात है। वह यंग ऑफिसर की तरह दिखते हैं। सूत्रों के मुताबिक दलबीर के फिटनेस में हर दिन 10 किलोमीटर पैदल चलना भी शामिल है।
घंटो दुर्गम बर्फीले पहाड़ चढ़कर जवानों से मिलने पहुचे लेफ्टिनेंट जनरल सुहाग के दृड़ होसलो को दुश्मन सेनिको ने सलाम किया
लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहाग ने चित्तौडगढ़ के सैनिक स्कूल से शिक्षा हासिल की और 1970 में राष्ट्रीय रक्षा अकैडमी में शामिल हुए। उन्होंने जून 1974 में 4.5 गोरखा रायफल्स में सेना में कमीशन प्राप्त किया। सेना उप प्रमुख बनने से पहले लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहाग 3 कोर में चीन की साथ लगी सीमा पर ऑपरेशनल जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं और इसके बाद वह 16 जून 2012 में पूर्वी कमान के प्रमुख बनाए गए। वह 31 दिसंबर 2013 तक पूर्वी कमान के प्रमुख रहे और इसके बाद उन्हें सेना उप प्रमुख बनाया गया।
लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहाग ने आर्मी स्कूल आफ मैकेनिकल ट्रांसपोर्ट (बंगलूर) तथा भारतीय सैन्य अकैडमी (देहरादून) में इंस्ट्रकटर रह चुके हैं और उन्होंने सेना की विभिन्न कोर और डिवीजनों में जिम्मेदारियां संभाली। वह 5 गोरखा रायफल्स के कर्नल कमांडेंट 19 अप्रैल 2011 से नियुक्त किए गए हैं और एक जनवरी 2014 को उन्हें प्रेसीडेंट गोरखा ब्रिगेड बनाया गया। लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहाग घुड़सवारी और तैराकी के शौकीन हैं। उनकी पत्नी श्रीमती नमिता सुहाग ने दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक किया है।
लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहाग ने निभाईं अहम भूमिकाएं-
– श्रीलंका में ऑपरेशन पवन के कंपनी कमांडर थे।
– जुलाई 2003 से मार्च 2005 में कश्मीर घाटी में कार्रवाई करने वाली 53 इन्फेंट्री ब्रिगेड की कमान संभाली।
– अक्टूबर 2007 से दिसंबर 2008 तक 8 माउंटेन डिवीजन के कमांडर रहे।
6 घंटे तक दुर्गम बर्फीले पहाड़ चढ़कर अपने जवानों से मिलने पहुचे लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहाग के दृड़ होसलो को दुश्मन के सेनिको ने भी सलाम किया-
दिसंबर 2007 की कड़कड़ाती ठंड। कश्मीर के फॉरवर्ड पोस्ट पर जवानों की टुकड़ी डिनर करने जा रही थी। तभी ऐसा मेहमान सामने आ गया, जिसे देख उनकी भूख मिट गई। उनके सामने खड़े थे उस इलाके के जनरल-अफसर-कमांडिंग दलबीर सिंह सुहाग। करीब 6 घंटे तक, घुटने बराबर बर्फ में वे 18 हजार फीट की ऊंचाई पर जवानों से मिलने पहुंचे थे। उनसे पहले कोई भी आर्मी कमांडर इस फॉरवर्ड पोस्ट पर नहीं आया था। जवानों ने उछल कर उनका स्वागत किया। सुहाग ने उनके साथ बैठ कर मक्के की रोटी और सरसों का साग खाया। उनके साथ तीन घंटे बिताए। फिर वापस छह घंटे चल अगली सुबह बटालिक लौटे। जनरल-अफसर-कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहाग से महज 80 मीटर की दूरी पर स्थित पाकिस्तानी पोस्ट में मौजूद सिपाही तक इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने भी भारतीय जनरल के होंसले और जज्बे को सैल्यूट किया।
लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहागकी ऐसी कई शोर्य कथाये सेना में दृष्टांत बनी हुयी हे.





















