काबुल/नई दिल्ली : अफगानिस्तान के हेरात प्रांत में भारतीय वाणिज्य दूतावास पर हमले में शामिल चारों आतंकियों को मार गिराने का दावा किया गया है। इस बीच नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि वहां वाणिज्य दूतावास के सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं। प्रधानमंत्री नामित नरेन्द्र मोदी ने हेरात प्रांत में भारतीय वाणिज्य दूतावास पर हुए हमले के संदर्भ में अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई से बात की जिन्होंने आश्वासन दिया कि वह अपने देश में भारतीय मिशनों की सुरक्षा के लिए सभी कदम उठाएंगे।
नयी दिल्ली में विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘अफगानिस्तान के हेरात में भारतीय वाणिज्य दूतावास पर हमला हुआ। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन की ओर से ट्विटर पर दी गई जानकारी में कहा गया है कि दूतावास में मौजूद सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं। विदेश सचिव सुजाता सिंह अफगानिस्तान के अधिकारियों के संपर्क में हैं। आईटीबीपी यानी इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस के बहादुर जवानों और अफगान सैनिकों ने हमलावरों को जवाब दिया।
जानकारी के मुताबिक, भारी हथियारों से लैस बंदूकधारियों ने भारतीय समय के अनुसार शुक्रवार तड़के पौने पांच बजे हमला किया। भारतीय अधिकारियों ने कहा कि इन हमलावरों के पास रॉकेट संचालित ग्रेनेड भी थे। मुठभेड़ पिछले पिछले छह घंटों से अभी तक जारी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा आईटीबीपी के बहादुर जवानों और अफगान सैनिकों ने मिलकर हमले को नाकाम कर दिया है, लेकिन कार्रवाई अभी जारी है। हमले की जिम्मेदारी फिलहाल किसी आतंकी ग्रुप ने नहीं ली है।
स्थानीय मीडिया का कहना है कि आतंकी वाणिज्य दूतावास के पीछे स्थित एक घर में छिपे हुए थे और मौका देखकर हमला कर दिया। अफगान पुलिस अधिकारियों ने कहा कि शुक्रवार सुबह पास के एक मकान से मशीनगनों और रॉकेट संचालित ग्रेनेड से लैस तीन बंदूकधारियों ने वाणिज्य दूतावास पर गोलीबारी शुरू कर दी। पुलिस ने इनमें से दो को मार गिराया, जबकि एक ने सुरक्षा बलों पर गोलीबारी जारी रखी है। किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।
भारत ने अफगानिस्तान में कई बड़े प्रॉजेक्ट्स में निवेश किया है। इनमें हेरात प्रांत में सलमा जलविद्युत बांध और काबुल में अफगान संसद की इमारत शामिल हैं। फिलहाल भारत की ओर से अफगानिस्तान को दी जा रही सहायता दो अरब डॉलर की है। इस बडी राशि के सहयोग के चलते भारत क्षेत्रीय देशों में से सबसे बड़ा दानदाता देश बन गया है।
अफगानिस्तान से इस साल के अंत में विदेशी सेनाओं की वापसी की योजना है। इसी बीच अफगानिस्तान में तालिबान के हमलों में वृद्धि देखने को मिली है। पिछले साल अगस्त में पाकिस्तान की सीमा के पास स्थित जलालाबाद शहर में भारतीय वाणिज्य दूतावास पर बमबारी का विफल प्रयास किया गया था। हालांकि इसमें छह बच्चों समेत कुल नौ लोग मारे गए थे लेकिन किसी भी भारतीय अधिकारी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा था। काबुल में भारतीय दूतावास पर वर्ष 2008 और 2009 में हमला हो चुका है और इसमें 75 लोग मारे गए थे।
जुलाई 2008 में काबुल में भारतीय दूतावास के बाहर आतंकियों ने आत्मघाती हमला किया था, जिसमें कम-से-कम 41 लोगों की मौत हो गई थी और डेढ़ सौल लोग घायल हो गए थे। अफगानिस्तान के सरकारी अधिकारियों के मुताबिक विस्फोटकों से भरी एक कार को आत्मघाती हमलावर ने भारतीय दूतावास के गेट पर टकरा दिया था, जिसके बाद विस्फोट हुआ था।






















