नई दिल्ली. सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहाग को अगला सेना प्रमुख नियुक्त करने की बुधवार को आधिकारिक रूप से घोषणा कर दी। रक्षा मंत्रालय की यहां जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार जनरल दलबीर सिंह 31 जुलाई को सेना प्रमुख का कार्यभार संभालेंगे। जब मौजूदा सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह अवकाशग्रहण कर रहे होंगे। जनरल दलबीर सिंह अभी सेना उप प्रमुख के पद पर हैं। उनका कार्यकाल 30 महीने का होगा।
लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहागकी नियुक्ति पर मंगलवार को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने मुहर लगा दी थी। सरकार ने सेना प्रमुख की नियुक्ति के मामले को चुनाव आयोग के पास भेज दिया था जिसने कल सरकार को इसके लिए हरी झंड़ी दे दी थी इस तरह सरकार ने अपने आखिरी दिनों में नियुक्ति की यह प्रक्रिया पूरी की है. हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब किसी सरकार ने अपने अंतिम दिनों में सैन्य बलों के प्रमुख की नियुक्ति की है। इसे पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार ने भी अपने कार्यकाल के अंतिम सप्ताह में एडमिरल अरुण प्रकाश को नौसेना प्रमुख नियुक्त किया था।
लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहाग ने चित्तौडगढ़ के सैनिक स्कूल से शिक्षा हासिल की और 1970 में राष्ट्रीय रक्षा अकैडमी में शामिल हुए। उन्होंने जून 1974 में 4.5 गोरखा रायफल्स में सेना में कमीशन प्राप्त किया। सेना उप प्रमुख बनने से पहले लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहाग 3 कोर में चीन की साथ लगी सीमा पर ऑपरेशनल जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं और इसके बाद वह 16 जून 2012 में पूर्वी कमान के प्रमुख बनाए गए। वह 31 दिसंबर 2013 तक पूर्वी कमान के प्रमुख रहे और इसके बाद उन्हें सेना उप प्रमुख बनाया गया।
लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहाग ने आर्मी स्कूल आफ मैकेनिकल ट्रांसपोर्ट (बंगलूर) तथा भारतीय सैन्य अकैडमी (देहरादून) में इंस्ट्रकटर रह चुके हैं और उन्होंने सेना की विभिन्न कोर और डिवीजनों में जिम्मेदारियां संभाली। वह 5 गोरखा रायफल्स के कर्नल कमांडेंट 19 अप्रैल 2011 से नियुक्त किए गए हैं और एक जनवरी 2014 को उन्हें प्रेसीडेंट गोरखा ब्रिगेड बनाया गया। लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहाग घुड़सवारी और तैराकी के शौकीन हैं। उनकी पत्नी श्रीमती नमिता सुहाग ने दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक किया है।
लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहाग ने निभाईं अहम भूमिकाएं-
– श्रीलंका में ऑपरेशन पवन के कंपनी कमांडर थे।
– जुलाई 2003 से मार्च 2005 में कश्मीर घाटी में कार्रवाई करने वाली 53 इन्फेंट्री ब्रिगेड की कमान संभाली।
– अक्टूबर 2007 से दिसंबर 2008 तक 8 माउंटेन डिवीजन के कमांडर रहे।
6 घंटे तक दुर्गम बर्फीले पहाड़ चढ़कर अपने जवानों से मिलने पहुचे लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहाग के दृड़ होसलो को दुश्मन के सेनिको ने भी सलाम किया-
दिसंबर 2007 की कड़कड़ाती ठंड। कश्मीर के फॉरवर्ड पोस्ट पर जवानों की टुकड़ी डिनर करने जा रही थी। तभी ऐसा मेहमान सामने आ गया, जिसे देख उनकी भूख मिट गई। उनके सामने खड़े थे उस इलाके के जनरल-अफसर-कमांडिंग दलबीर सिंह सुहाग। करीब 6 घंटे तक, घुटने बराबर बर्फ में वे 18 हजार फीट की ऊंचाई पर जवानों से मिलने पहुंचे थे। उनसे पहले कोई भी आर्मी कमांडर इस फॉरवर्ड पोस्ट पर नहीं आया था। जवानों ने उछल कर उनका स्वागत किया। सुहाग ने उनके साथ बैठ कर मक्के की रोटी और सरसों का साग खाया। उनके साथ तीन घंटे बिताए। फिर वापस छह घंटे चल अगली सुबह बटालिक लौटे। जनरल-अफसर-कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहाग से महज 80 मीटर की दूरी पर स्थित पाकिस्तानी पोस्ट में मौजूद सिपाही तक इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने भी भारतीय जनरल के होंसले और जज्बे को सैल्यूट किया।
लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहागकी ऐसी कई शोर्य कथाये सेना में दृष्टांत बनी हुयी हे.
दक्षिणी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अशोक सिंह जिनके बेटे की शादी, पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह की बेटी से हुई है भी सेनाध्यक्ष पद के प्रमुख दावेदार थे। शायद इसी कारण वीके सिंह लगातार सार्वजनिक तौर पर सुहाग की नियुक्ति की मुखालफत करते रहे, पर लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहाग उप थल सेनाध्यक्ष थे और इस नाते वो स्वाभाविक तौर पर फौज की परम्परानुसार थल सेनाध्यक्ष बने.






















