मंथन. नई दिल्ली: 24 सितंबर को भारत का मंगलयान मंगल की कक्षा में प्रवेश करेगा. इसे पिछले साल 5 नवंबर को इसरो के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से पोलर सैटलाइट लॉन्च वीइकल (पीएसएलवी) सी-25 की मदद से छोड़ा गया था. इसरो का कहना है कि मंगलयान अपने लक्ष्य की ओर बिना किसी दिक्कत के बढ़ रहा है. इस अभियान को मार्स ऑर्बिटर मिशन नाम दिया गया है. भारत के इस मिशन के लिए सरकार ने इसरो को 3 अगस्त 2012 को मंजूरी दी थी. इस मिशन की लागत 450 करोड़ रुपये (करीब छह करोड़ 90 लाख डॉलर) है.
मंगलयान के सफर को कामयाब बनाकर भारत अंतरिक्ष के मामले में अपनी टेक्नॉलजी का लोहा मनवाना चाहता है. इसके साथ ही वो अपनी वैज्ञानिक उत्सुकता को भी शांत करना चाहता है. मंगलयान के जरिए भारत मंगल ग्रह पर जीवन के सूत्र तलाशने के साथ ही वहां के पर्यावरण की जांच करना चाहता है. वो ये भी पता लगाना चाहता है कि इस लाल ग्रह पर मीथेन मौजूद है कि नहीं. मीथेन गैस की मौजूदगी जैविक गतिविधियों का संकेत देती है.
इसके लिए मंगलयान को करीब 15 किलो वजन के कई अत्याधुनिक उपकरणों से लैस किया गया है. इसमें कई पावरफुल कैमरे भी शामिल हैं. मंगल की कक्षा में पहुंचने के बाद इसके उपकरण इस लाल ग्रह की पड़ताल करना शुरू कर देंगे.























