


लखनऊ. मंथन : उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बीएसपी अध्यक्ष मायावती ने दलित अल्पसंख्यक अतिपिछडे और अभी साथ आये ब्राह्मण वोट बैंक को एकजूट करते हुए बीएसपी को बचाने के लिए काशीराम की तरह राजनेतिक भूमिका स्पस्ट करते हुए उन सारे दावों को खारिज किया है, जिसमें भविष्य में बीजेपी के साथ बीएसपी गठबंधन के कयास लगाए जा रहे थे।
उन्होंने कहा कि इस चुनाव में बीजेपी की हालत पतली हो गई है, इसलिए वह अब सहयोगियों की बात कर रही है। मायावती ने बीजेपी और नरेंद्र मोदी पर मुस्लिमों को गुमराह करने का भी आरोप लगाया।
दरअसल मोदी ने अपने ताजा इंटरव्यू में कहा है कि अगर उन्हें बहुमत नहीं मिला तो वह जयललिता, ममता बनर्जी और मायावती से समर्थन की मांग करेंगे।
बीजेपी पर ओछी चालें चलने का आरोप लगाते हुए मायावती ने कहा कि उसने हमेशा बीएसपी आंदोलन को क्षति पहुंचाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा, केंद्र में एनडीए की पिछली सरकार के कार्यकाल में बसपा आंदोलन को नुकसान पहुंचाने के लिए मेरे खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के आरोप में मामला दर्ज करवा दिया गया था। इसी तरह, प्रदेश में जब-जब उन्होंने (बीजेपी) हमारे साथ सरकार बनाई बीएसपी आंदोलन को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।
वाराणसी और चंदौली में चुनावी जनसभाओं को संबोधित करने के लिए रवाना होने से पहले मायावती ने कहा, मोदी के बयान के सहारे विरोधी दल बीएसपी को नुकसान पहुंचा सकते है, इसलिए रैलियों को संबोधित करने जाने से पहले हमने इस प्रकरण में अपनी स्थिति स्पष्ट कर देना जरूरी समझा।
शुक्रवार को वाराणसी एवं चंदौली संसदीय सीटों के बसपा प्रत्याशियों के समर्थन में जाल्हूपुर में आयोजित संयुक्त जनसभा में उपस्थित भीड़ को संबोधित करते हुए मायावती ने की कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने देश को सरकार बनाबनाकर लूटा, पांच साल के लिए भाजपा ने तो दलितों एवं गरीबों के हितों के लिए कोई भी कदम नहीं उठाए। उन्होंने नरेंद्र मोदी के उस बयान को भी झूठा बताया, जिसमें पीएम बनने के बाद काशी के चतुर्दिक विकास की बात कही है। कहा कि केन्द्र में पांच साल भाजपा की सरकार रही, तो उस समय काशी क्यों याद नहीं आयी।
बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने एक बार फिर भाजपा, कांग्रेस व समाजवादी पार्टी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी यदि पीएम बने, तो पूरे देश में सांप्रदायिक तनाव पैदा होगा, क्योंकि देशवासी 2002 में गोधरा में हुए सांप्रदायिक दंगे को अब तक नहीं भूले हैं।
मायावती ने भाजपा-सपा पर सत्ता पाने के लिए हिन्दू-मुस्लिमों को बांटने की साजिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने यूपी में कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए और कहा कि जिस राज्य की कानून व्यवस्था माफियाओं व गुंडों के इशारे पर चल रही हो, उस राज्य की स्थिति का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है।
मायावती ने जातिवादी कार्ड भी भुनाने की कोशिश की और कहा कि आरक्षण में प्रमोशन के मुद्दे पर कांग्रेस, भाजपा एवं सपा ने विरोध किया। उन्होंने सभी दलों को आरक्षण विरोधी बताते हुए कहा कि कांग्रेस, भाजपा एवं सपा नहीं चाहतीं कि अनुसूचित जाति के लोगों को सरकारी नौकरी में प्रमोशन में आरक्षण का लाभ मिले।
मायावती ने कहा कि यूपी में कोई ऐसा दिन नहीं, जब व्यापारियों के साथ लूट और महिलाओं की अस्मत के साथ खिलवाड़ किया न किया जा रहा हो। यहां माफिया व गुंडों के इशारे पर सत्ता चल रही है। पूरी कानून व्यवस्था ध्वस्त है और गुंडे-माफिया नेताओं के साथ घूम रहे हैं।
मायावती ने कहा कि जब वह सरकार में थीं, तब गुंडे-माफियाओं की जगह जेल में थी। मायावती ने जनसभा में मौजूद भीड़ को यह बताने की कोशिश की, कि यदि बसपा के सांसद अधिक से अधिक जीतकर संसद में जाते हैं, तो दलितों एवं शोषितों की मांगों को दबाव बनाकर पूरा कराया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 1989 में वीपी सिंह की सरकार थी। तीन सांसद बसपा के चुनकर गए थे। समर्थन देने की बात आयी तो तीन शर्तें बाबा साहेब अंबेडकर को भारत रत्न की उपाधि देने, मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू करने एवं लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा को रोकने की मांग मांग रखी थी। वीपी सिंह को बात माननी पड़ी।
मायावती ने वोटरों को समझाया कि केवल बसपा ही ऐसी पार्टी है, जो उनके हितों का ध्यान रख सकती है। उन्होंने भाजपा, कांग्रेस व सपा की साम, दाम दंड एवं भेद की नीति से सावधान किया और बसपा प्रत्याशियों को जिताने की अपील की।























