नई दिल्ली: कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद और प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा विवादों में हैं. इस बीच एक अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने वाड्रा की संपत्ति के बारे में नया खुलासा किया है.अमेरिकी न्यूज वेबसाइट द वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा के बारे में सनसनीखेज दावे किए हैं। वेबसाइट पर प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वाड्रा ने 2007 में अपनी कंपनी 1 लाख रुपये के निवेश के साथ शुरू की थी। कंपनी के जरिए 2012 में वाड्रा ने 12 मिलियन डॉलर (72 करोड़ रुपए से ज्यादा) की प्रॉपर्टी बेची। उनके पास अभी भी 42 मिलियन डॉलर यानी करीब 250 करोड़ रुपए की रीयल एस्टेट प्रॉपर्टी है। यानी 2007 से 2012 के बीच वाड्रा की संपत्ति 1 लाख रुपये से बढ़कर 322 करोड़ रुपए पहुंच गई। वेबसाइट के मुताबिक, वाड्रा और गांधी परिवार के लिए महेश नागर नाम के एक नेता जमीनों का सौदा करते हैं।
अमेरिकी न्यूज वेबसाइट द वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) रिपोर्ट के मुताबिक 2012 में वाड्रा के पास करीब 252 करोड़ की जमीन जायदाद थी. उसी साल वाड्रा ने 72 करोड़ की जमीन जायदाद बेची थी. यानी 2012 में रॉबर्ट वाड्रा के पास करीब 324 करोड़ की जमीन जायदाद थी. कंपनी की ऑडिट रिपोर्ट, लैंड रिकॉर्ड औऱ प्रॉपर्टी जानकारों के हवाले से रॉबर्ट के जमीन जायदाद का गुणाभाग किया है.
द वॉल स्ट्रीट के मुताबिक वाड्रा ने 2009 में जमीन जायदाद खरीदनी शुरू की थी. जिसकी कीमत 3 साल में बढ़कर 300 करोड़ से ज्यादा हो गई.2004 में यूपीए सरकार के सत्ता में आने के समय वाड्रा ज्वेलरी के छोटे मोटे कारोबार में थे.
उन्होंने 2007 में करीब 90 हजार से स्काई लाइट नाम की कंपनी बनाई. 2008 में वाड्रा ने साढ़े तीन एकड़ जमीन गुडगांव में 13 लाख डॉलर (लगभग 6 करोड़ 65 लाख रुपए) में खरीदी। दो महीने बाद हरियाणा की कांग्रेस सरकार से कृषि जमीन को व्यवसायिक भूमि में बदलने की इजाजत मांगी जो 18 दिन में मिल गई। इससे जमीन की कीमत काफी बढ़ गई। इसके बाद अगले चार साल तक डीएलएफ ने वाड्रा की कंपनी में पैसे लगाए।
कंपनी की बैलेंसशीट में इसे एडवांस कहा गया है। 2012 में डीएलएफ में 97 लाख डॉलर में गुड़गांव की प्रॉपर्टी खरीदी। 2008 में जो जमीन वाड्रा ने खरीदी उसकी सात गुना ज्यादा कीमत डीएलएफ ने वाड्रा को दी। हरियाणा के आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने इसको लेकर सवाल उठाया था कि वाड्रा ने अपनी जेब से पेमेंट नहीं की। इसीलिए खेमका ने इस जमीन सौदा को रद्द कर दिया था।
वहीं, रॉबर्ट वाड्रा के प्रवक्ता का कहना है कि राजनीतिक कारणों से उनकी छवि खराब की जा रही है। प्रवक्ता के मुताबिक, वाड्रा ने सभी कानूनों का पालन किया है और किसी की कोई मदद नहीं ली है। कांग्रेस प्रवक्ता सब कुछ कानूनों का पालन कर करना और उस पर सुप्रीम कोर्ट से क्लीन चिट मिलना बता रहे हे.





















