भोपाल. देश में लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के बाद राजनीतिक दलों के स्टार प्रचारक अथवा चुनाव लड़ने वाले अभिनेताओं की फिल्मों के प्रदर्शन, टीवी धारावाहिकों तथा विज्ञापनों के प्रसारण पर सवाल उठा है। भारत के निर्वाचन आयोग से इन प्रसारणों को आचार संहिता का उल्लंघन मानकर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।
सामाजिक कार्यकर्ता संजीव पांडे ने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद ऐसे कलाकारों की फिल्मों का प्रदर्शन, टीवी धारावाहिकों और विज्ञापनों के प्रसार पर तत्काल रोक लगा दी जानी चाहिए, जो या तो राजनीतिक दलों के स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल हैं अथवा चुनाव लड़ रहे हैं।
पांडे ने आयोग के समक्ष उठाए गए मुद्दों की चर्चा करते हुए कहा कि स्टार प्रचारक व चुनाव लड़ने वाले अभिनेता चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा बन चुके हैं, जबकि फिल्मों में उनको अत्याचार के खिलाफ लड़ने वाला नायक बताने के साथ सामाजिक उत्थान का प्रतीक बताया जाता है। फिल्म में जो दिखाया जाता है, वह सच्चाई से परे होता है। अभिनेताओं की इस छवि का मतदाताओं पर गहरा असर होता है, लिहाजा चुनाव प्रभावित होते हैं। इसलिए जरूरी है कि इन गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाई जाए।
पांडे का आगे कहना है कि एक तरफ मतदाताओं पर फिल्में असर छोड़ती हैं, वहीं टीवी पर चल रहे धारावाहिक व विज्ञापन भी उसे प्रभावित करते हैं। पांडे ने कहा कि पूर्व में दूरदर्शन चुनाव के दौरान ऐसे कलाकारों की फिल्मों, धारावाहिकों व विज्ञापनों के प्रसारण रोक देता था जो चुनाव का हिस्सा होते थे।
चुनाव आयोग को भेजे आवेदन में पांडे ने मांग की है कि ऐसे सभी कलाकारों, खिलाडिम्यों से जुड़ी फिल्मों, धारावाहिकों व विज्ञापनों के प्रसारण पर तत्काल रोक लगाई जाए जो स्टार प्रचारक व उम्मीदवार के तौर पर आगामी लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं । सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा उठाए गए सवालों पर चुनाव आयोग का नजरिया अभी सामने आना बाकी है।























