जोधपुर. बाड़मेर से टिकट नहीं मिलने के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह बागी तेवर में हैं। उन्होंने शनिवार को कहा- लड़ाई अब असली व नकली भाजपा के बीच है। 24 मार्च को बाड़मेर में ही बताऊंगा कि कौन है नकली और कौन है असली भाजपा। माना जा रहा है कि वे बड़ी रैली कर निर्दलीय चुनाव लडऩे की घोषणा कर सकते हैं। भाजपा ने बाड़मेर से पूर्व सांसद कर्नल सोनाराम को टिकट दिया है। वे हाल ही कांग्रेस से आए हैं। पार्टी ने जसवन्त को चित्तोड़ या जोधपुर से भी टिकट नहीं देकर मोदी और वसुंधरा की युति की सर्वोच्चता सिद्ध कर दी और साफ कर दिया है कि कांग्रेस सेर दलबल कर आये सोनाराम का टिकट नहीं बदलेंगे।
इस सीट के लिए दावेदारी जसवंत सिंह कर रहे थे। दलील दी थी कि इस बार आखिरी चुनाव लड़ रहा हूं, इसलिए घर से ही लडऩा चाहूंगा। पार्टी फैसले से नाराज जसवंत सिंह शनिवार को जोधपुर पहुंचे। मीडिया से बातचीत की और नाम लिए बिना पार्टी नेतृत्व को खरीखोटी सुनाई। बोलते-बोलते जसवंत सिंह का गला भर आया। आंसू रोकने की कोशिश करने लगे। लेकिन काबू नहीं कर पाए, रोने लगे। आखिरकार रुमाल निकाला और आंखें पोंछी। फिर खुद को संभालकर बोलने लगे। जब उनसे कहा गया कि पार्टी कहीं और आपको जगह देने की बात कह रही है, इस पर बोले- ‘मैं बिकाऊ नहीं हूं। मेरी प्रतिष्ठा कोई खरीद-फरोख्त की चीज नहीं है।’ और फिर रुआंसे हो गए।
इस बीच भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने साफ कर दिया है कि पार्टी फैसला नहीं बदलेगी। लेकिन सुषमा स्वराज ने इस पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा- ‘यह फैसला चुनाव समिति ने नहीं लिया है। इस तरह का फैसला अकारण नहीं लिया गया होगा। कुछ न कुछ वजह होगी। लेकिन मैं इस फैसले से दुखी हूं।’
समर्थकों ने भाजपा कार्यालयों में की तालेबंदी
बाड़मेर में जसवंत समर्थकों का गुस्सा दूसरे दिन भी उफान पर रहा। लोगों ने क्षेत्र में भाजपा के कई कार्यालयों में तालेबंदी की। साथ ही जसवंत सिंह के समर्थन में शहर में पोस्टर भी चिपकाए गए। भाजपा के स्थानीय नेताओं ने ये भी साफ किया कि वे लोग कर्नल सोनाराम को जिताने के लिए काम नहीं करेंगे। दलील दी कि जिसके खिलाफ हम सालों से विरोध प्रदर्शन करते रहे अब उसके लिए वोट कैसे मांग सकते हैं?
क्या मोदी वसुंधरा ने निपटाया जसवन्त को
वाजपेयी के दौर में नरेंद्र मोदी को चुनाव समिति से बाहर किया गया था। इसमें जसवंत का हाथ माना गया था। अब बाड़मेर सीट की बात चली तो जसवंत को जोधपुर व चित्तौडग़ढ़ का रास्ता बताया गया। फिर दोनों जगह भी नाम तय कर दिए। जसवंत आडवाणी के खेमे में रहे। उनके साथ भी वही हुआ जो आडवाणी ने भी भुगता।
कभी अटल की बगल में होते थे, आज उपेक्षा के आंसू
जसवंत सिंह जसोल, यानी भाजपा के तीन प्रमुख चेहरों में से एक। एक वक्त था जब प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी के एक तरफ लालकृष्ण आडवाणी तो दूसरी ओर जसवंत ही बैठे दिखाई देते थे। जिन्ना पर किताब और कंधार प्रकरण में किरकिरी के बाद भी हैसियत बनाने में ज्यादा वक्त नहीं लगाया। जसवंत अब उसी पार्टी के हाशिये पर आ गए। एक बार वसुंधरा ने एक भाषण में कहा था कि खंडहरों की अहमियत जितनी होती है, उतनी ही रहती थी। इस बात पर रोष जताने वालों में जसवंत भी थे। आज उन्हीं खंडहरों में से बुर्ज हिला तो उसका दर्द बह निकला
लड़ाई असली व नकली भाजपा के बीच
जसवंत ने कहा- भाजपा के चाल व चरित्र का अतिक्रमण हो रहा है। बाहरी लोग आ रहे हैं। इशारा कर्नल सोनाराम व ऐसे ही अन्य नेताओं की तरफ था। बोले- आज रेल-हवाई जहाज का टिकट मुश्किल से मिलता है, भाजपा में टिकट आसान हो गया है? जनता के लिए चुनौती है कि वह असली और नकली भाजपा का चुनाव करे।
वसुंधरा का मैंने क्या सहयोग नहीं किया?
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से बनते-बिगड़ते रिश्तों का अनुभव रखने वाले जसवंत सिंह ने कहा कि राजे ही बताएं कि मैंने सहयोग करने में कोई कसर छोड़ी थी क्या?
सियासी धर्मसंकट में फंसे पिता-पुत्र
जसवंत के बेटे मानवेंद्र भाजपा विधायक हैं। जब उनसे पूछा गया कि जसवंत निर्दलीय लड़ते हैं तो क्या वे साथ देंगे? मानवेंद्र बोले- चुनाव लडऩे, नहीं लडऩे का फैसला जसवंत करेंगे। जसवंत से पूछा गया कि क्या मानवेंद्र साथ देंगे तो वे बोले- मानवेंद्र जाने। इस बीच मानवेंद्र ने बैड रेस्ट के लिए पार्टी से एक माह की छुट्टी मांगी है।
वसुंधरा के पोस्टर पर पत्नी ने किया था केस
पिछले कार्यकाल के दौरान वसुंधरा के देवी स्वरूप पोस्टर व मूर्ति बनाई गई थी। तब जसवंत की पत्नी शीतल कंवर ने मुकदमा दर्ज करवा दिया था। नाराजगी का बीज यहीं से फूटा। विधानसभा चुनाव में तो उन्हें मना लिया मगर लोकसभा के वक्त सोनाराम को कांग्रेस छुड़ा कर भाजपा में लाकर टिकट भी दिला दिया।
सुषमा ने भी किया विरोध
जसवंत सिंह को लेकर भाजपा के फैसले पर सुषमा स्वराज ने भी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि घ्यह फैसला चुनाव समिति ने नहीं लिया है। इस तरह का फैसला अकारण नहीं लिया गया होगा। कुछ न कुछ वजह होगी




















