नईदिल्ली. नरेंद्र मोदी को सबसे बड़ी चुनौती एक बार फिर खुद बीजेपी के अंदर से ही मिल रही है। एक तरफ लालकृष्ण आडवाणी को मनाने की कोशिशें जारी हैं, दूसरी तरफ वरिष्ठ बीजेपी नेता जसवंत सिंह खुलकर बगावती तेवर दिखा रहे हैं। जिस तरह की कोपभवन की राजनीति बीजेपी में चल रही है उससे तीन बड़े सवाल उठते हैं।
एक कि क्या बीजेपी में अब भी ऐसा गुट है जो नरेंद्र मोदी के नेतृत्व से खुश नहीं है, दूसरा कि क्या नरेंद्र मोदी अपने सीनियर नेताओं को साथ में लेकर चल नहीं पा रहे हैं। और सबसे बड़ा सवाल क्या इसका नुकसान पार्टी को होगा। इन सभी सवालों का जवाब जानने की कोशिश सीएनबीसी आवाज़ के इस खास शो में की गई है।
बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने आज लालकृष्ण आडवाणी को लेकर पैदा हुए मनमुटाव को कम करने की कोशिश की। राजनाथ सिंह ने कहा कि पार्टी लालकृष्ण आडवाणी जी का बहुत सम्मान करती है और उनकी जहां से मर्जी होगी वो वहां से चुनाव लड़ेंगे। दरअसल, लालकृष्ण आडवाणी भोपाल से चुनाव लड़ना चाहते हैं लेकिन पार्टी ने उनको गांधीनगर से ही टिकट दिया है। वहीं लालकृष्ण आडवाणी के बाद जसवंत सिंह टिकट को लेकर नाराज हो गए हैं। जसवंत सिंह के मुताबिक उन्हें बाड़मेर से टिकट मिलेगा तो ठीक है वरना वो निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे।
इससे पहले पार्टी की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने श्रीरामुलू को बीजेपी में शामिल करने को लेकर नाराजगी जताई थी। सुषमा स्वराज ने तो ट्विटर पर खुलकर अपना विरोध जताया था। वहीं लखनऊ से मौजूदा सांसद और बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालजी टंडन ने सिर्फ नरेंद्र मोदी के लिए अपनी सीट छोड़ने की बात कही थी। हालांकि लखनऊ संसदीय सीट से बीजेपी ने पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है।
मुरली मनोहर जोशी को नरेंद्र मोदी के लिए वाराणसी सीट छोड़नी पड़ी और उन्हें पार्टी ने कानपुर सीट से उम्मीदवार बनाया है। बिहार की पटना साहिब सीट को लेकर शत्रुघ्न सिन्हा और रविशंकर प्रसाद के बीच होड़ है। बिहार में पार्टी के दिग्गज नेता गिरिराज सिंह को नवादा से टिकट मिला है, लेकिन वो बेगूसराय से लड़ना चाहते थे। यूपी में बीजेपी के दिग्गज नेता सूर्य प्रताप शाही देवरिया संसदीय क्षेत्र से टिकट चाहते थे, लेकिन बीजेपी ने कलराज मिश्रा को इस सीट से अपना उम्मीदवार बना दिया।
बीजेपी के संस्थापकों में शामिल जसवन्तसिंह ने कहा कि बीजेपी के दर्शन को अपनाने वालों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे जाने कि कौन अतिक्रमण कर रहा है और उनका क्या फायदा है? पूर्व केंद्रीय मंत्री को वरिष्ठ पार्टी नेता लालकृष्ण आडवाणी का करीबी माना जाता है और ऐसी अटकलें हैं कि नरेंद्र मोदी ने बाड़मेर टिकट के मुद्दे पर राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के रुख का समर्थन किया था.
अब वैकल्पिक प्रस्ताव मंजूर नहीं
कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए कर्नल सोनाराम चौधरी को बाड़मेर से टिकट दिए जाने के एक दिन बाद सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि पार्टी मेरे साथ दो बार ऐसा कर चुकी है और अब वैकल्पिक प्रस्ताव स्वीकार करने की कोई संभावना नहीं है. सिंह ने पार्टी नेतृत्व पर निशाना साधा लेकिन किसी का नाम नहीं लिया. उनकी टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह और वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने उपयुक्त तरीके से सिंह की सेवाएं लेने की बात कही है.
पार्टी विरोधियों का जमावड़ा
जसवंत ने कहा कि दुर्भाग्य से विचाराधारा वाली पार्टी का अतिक्रमण ऐसे लोग कर रहे हैं जो पार्टी की विचारधारा के विरोधी रहे थे. उन्होंने किसी का नाम लिए बिना कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बीजेपी को इन तत्वों (बाहरी) ने पूरी तरह से नियंत्रण में ले लिया है, जिन्हें पार्टी की विचारधारा के प्रति कोई सम्मान नहीं है.
आज पहुंचेंगे बाड़मेर
सिंह कल बाड़मेर पहुंचेंगे. हालांकि उन्होंने अपनी योजनाओं के बारे में कुछ भी बताने से इंकार किया. उन्होंने कहा कि बाड़मेर पहुंचने के बाद ही सभी बातों पर निर्णय करूंगा और अपने समर्थकों के साथ चर्चा करूंगा. पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बीजेपी अब दो गुटों में बंट गई है, एक जो वास्तविक है और दूसरी जो नकली है और दुर्भाग्य से नकली के हाथों में अब पार्टी है.





















