नई दिल्ली। विपक्ष के विरोध और एक के बाद एक बड़े न्यायविदों के पल्ला झाड़ने के बाद अब केंद्र सरकार ने लोकपाल नियुक्त करने का काम अगली सरकार के भरोसे छोड़ने का फैसला लिया है। सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार इस मुद्दे पर और विवाद में नहीं पड़ना चाहती और नए लोकपाल की नियुक्ति का मामला नई सरकार के गठन तक टालना चाहती है।
गौरतलब है कि नए लोकपाल के लिए चयन समिति के गठन के साथ ही विवाद शुरू हो गया था। मुख्य विपक्षी दल बीजेपी ने इसकी खामियां गिनाकर इसका विरोध किया। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने इसे लेकर पीएम को पत्र भी लिखा। सर्च कमेटी में पीएम द्वारा मनोनीत पी पी राव को लेकर बीजेपी को ऐतराज था।
इसके बाद फली नरीमन और देश के अन्य ख्यातिप्राप्त न्यायविदों ने लोकपाल सर्च कमेटी से यह कहकर खुद को अलग कर लिया कि इस माहौल में निष्पक्ष रूप से काम कर पाना संभव नहीं है। नरीमन ने कहा था कि उन्हें डर है कि लोकपाल सर्च पैनल के सिलेक्शन में एक स्वतंत्र, साहसी और योग्य शख्स को नजरंदाज कर दिया जाएगा।
राजनीतिक जानकार इसे केंद्र सरकार को एक बड़े झटके के तौर पर देख रहे हैं। राहुल गांधी चुनाव प्रचार के दौरान हर बार देश को लोकपाल देने की बात कहकर इसका श्रेय लूट रहे हैं लेकिन उनकी सरकार लोकपाल के गठन से हाथ खड़े कर रही है। इससे करप्शन के खिलाफ होने का कांग्रेस का दावा भी और कमजोर होगा।























