वाराणसी.तमाम कयासों के बाद आखिरकार ये तय हो गया कि नरेंद्र मोदी वाराणसी से ही चुनाव लड़ेंगे। लेकिन, इसके साथ ही एक बड़ा सवाल सबके सामने है कि आखिर नरेंद्र मोदी, पूर्वी उत्तर प्रदेश में वाराणसी से ही क्यों चुनावी रणभूमि में उतर रहे हैं? आखिर पार्टी के वरिष्ठ नेता और मौजूदा सांसद मुरली मनोहर जोशी को सीट छोड़ने के लिए क्यों मजबूर किया गया?
क्या ये माना जाए कि वाराणसी के जरिए बीजेपी में हिंदुत्व कार्ड की वापसी हो रही है? और क्या वाराणसी में नरेंद्र मोदी के आने से बिहार की सीटें भी प्रभावित होंगी। साथ में अगर आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल वाराणसी से चुनाव लड़ते है तो किसको फायदा होगा और किसको नुकसान।
धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से वाराणसी काफी अहम माना जाता है, और संघ के चलते बीजेपी का वाराणसी में नेटवर्क बाकी पार्टियों से मजबूत है। वहीं वाराणसी, पूर्वी यूपी और पश्चिमी बिहार के लिए कंट्रोल कमांड की तरह काम कर सकता है। माना जा रहा है कि बीजेपी की ओर से अयोध्या, मथुरा और बिहार के जरिए हिंदुत्व के मुद्दे पर वापसी की जा रही है।
पूर्वी यूपी में पिछड़ी जातियों का बाहुल्य है और यहां से 22 सांसद चुने जाएंगे। साथ ही नरेंद्र मोदी की वाराणसी से उम्मीदवारी पूर्वी यूपी, पश्चिमी बिहार की करीब 25-30 सीटों पर भी असर डालेगी। नरेंद्र मोदी के जरिए बीजेपी की निगाहें बिहार और झारखंड की सीटों पर भी है। बिहार में बक्सर, आरा, गया और झारखंड का पलामू वाराणसी के पास मौजूद है।
वाराणसी संसदीय सीट से नरेंद्र मोदी को कौमी एकता दल के मुख्तार अंसारी से कड़ी टक्कर मिल सकती है। वहीं समाजवादी पार्टी ने वाराणसी से कैलाश चौरसिया को उम्मीदवारी दी है, तो बीएसपी ने विजय प्रकाश जायसवाल को उम्मीदवारी दी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि अरविंद केजरीवाल भी नरेंद्र मोदी के खिलाफ ताल ठोंक सकते हैं। कांग्रेस की ओर से नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी से अजय राय को उम्मीदवारी दी जा सकती है।
2009 में मुख्तार अंसारी सिर्फ 18,000 वोटों से हारे थे, और नरेंद्र मोदी के लड़ने से मुस्लिम वोटरों का ध्रुवीकरण संभव है। वहीं पहली बार वाराणसी से बीजेपी का लोकसभा प्रत्याशी अन्य पिछड़ी जाति का है। 1996, 1998, 1999 में बीजेपी के एस पी जायसवाल सांसद रहे, तो 1991 में श्रीश चन्द्र दीक्षित बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीते थे। वाराणसी संसदीय क्षेत्र की 5 विधानसभा सीटों में 3 बीजेपी के पास हैं। इस बार वाराणसी में 60,000 युवा पहली बार मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे।























