नई दिल्ली।सभी दलों की भरपूर कोशिशो से लोकपाल बिल दोनों सदनों से पास होकर राष्ट्रपति के अनुमोदन से कानून बनेगा, अन्ना के आमरण अनशन के चलते लोकपाल कानून को बनाने के लिए दबाब बना , आम आदमी पार्टी को अलग थलग करते हुए कांग्रेस और बीजेपी ने अभूतपूर्व एकता दिखाते हुए अन्ना को अपने पक्ष में लेते हुए अन्य सभी दलों को सहमत कराते हुए आखिरकार लोकपाल बिल को कानून में परिवर्तित करने में कामयाबी हासिल करली।
समझा जा रहा हे कि आम आदमी पार्टी के गठन होने और दिल्ली विधानसभा में विस्मयकारी जीत हासिल करने दे स्पस्ट हो गया था की जनता के सामने कांग्रेस और बीजेपी ही नहीं सभी सियासी बिरादरी निवस्त्र हो चुकी थी, इन दलों ने जब दिल्ली विधानसभा के परिणाम देखे तो शायद आपस में मिलकर आमआदमी पार्टी को दरकिनार करने की रणनीति बनाकर अन्ना को महाराष्ट्र के कुछ मंत्रियो और किरण बेदी और जनरल वीके सिंह के माध्यम से लोकपाल बिल के प्रारूप के बिन्दुओ से सहमत कराया , ताकि आम आदमी पार्टी के गठन का मुख्य मुद्दा ही ख़त्म किया जाये. भले ही इसी बजह से मिला हो, देश को लोकपाल जेसा कानून तो मिला.
क्या है संसद में पारित लोकपाल विधेयक
आखिरकार लोकपाल विधेयक पर संसद की दोनों सदनों ने अपनी मुहर लगा दी.अब ये बिल राष्ट्रपति के पास जाएगा.राष्ट्रपति के अनुमोदन मिलते ही ये विधेयक लोकपाल कानून का रुप ले लेगा.
लोकपाल का एक अध्यक्ष होगा. लोकपाल का अध्यक्ष या तो भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश या फिर सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज या फिर कोई महत्वपूर्ण व्यक्ति हो सकता है. लोकपाल में अधिकतम आठ सदस्य हो सकते हैं, जिनमें से आधे न्यायिक पृष्ठभूमि से होंगे. इसके अलावा कम से कम आधे सदस्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ी जाति, अल्पसंख्यकों और महिलाओं में से होने चाहिए.
लोकपाल की चयन समिति
– प्रधानमंत्री- अध्यक्ष- लोकसभा के अध्यक्ष- सदस्य- लोकसभा में विपक्ष के नेता- सदस्य- मुख्य न्यायाधीश या उनकी अनुशंसा पर नामित सुप्रीम कोर्ट के एक जज- सदस्य- राष्ट्रपति द्वारा नामित कोई प्रतिष्ठित व्यक्ति- सदस्य
कौन नहीं हो सकता लोकपाल का सदस्य?
– संसद सदस्य या किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभा का सदस्य- ऐसा व्यक्ति जिसे किसी किस्म के नैतिक भ्रष्टाचार का दोषी पाया गया हो- ऐसा व्यक्ति जिसकी उम्र अध्यक्ष या सदस्य का पद ग्रहण करने तक 45 साल न हुई हो- किसी पंचायत या निगम का सदस्य.
पद छोड़ने के बाद क्या करेगा लोकपाल
– लोकपाल कार्यालय में नियुक्ति खत्म होने के बाद अध्यक्ष और सदस्यों पर कुछ काम करने के लिए प्रतिबंध लग जाता है- इनकी अध्यक्ष या सदस्य के रूप में पुनर्नियुक्ति नहीं हो सकती-इन्हें कोई कूटनीतिक ज़िम्मेदारी नहीं दी जा सकती और केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक के रूप में नियुक्ति नहीं हो सकती. इसके अलावा ऐसी कोई भी ज़िम्मेदारी या नियुक्ति नहीं मिल सकती जिसके लिए राष्ट्रपति को अपने हस्ताक्षर और मुहर से वॉरंट जारी करना पड़े-पद छोड़ने के पांच साल बाद तक ये राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, संसद के किसी सदन, किसी राज्य विधानसभा या निगम या पंचायत के रूप में चुनाव नहीं लड़ सकते.
अब लोकपाल कानून को बनाने की श्रेय लेने की होड़ शुरू हो गयी
कांग्रेस ने 1963 से अब तक नेहरु इंदिरा राजीव और मनमोहन की यूपीए और विशेष कर राहुल द्वारा लिए गए संकल्प को, निरंतर किये प्रयासों को श्रेय दिया तो अन्ना ने कांग्रेस बीजेपी और सभी दलों की सहमती को श्रेय दिया। नेता सुषमा स्वराज ने इस विधेयक के लिए अन्ना हजारे को धन्यवाद दिया वहीं कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि इससे जुड़े और भी कानून साथ ही आ रहे हे जिससे भ्रस्टाचार पर काबू किया जा सकेगा और जनता को सुबिधा सुनिश्चित होगी,आज का दिन ऐतिहासिक है.कुछ लोगो के द्वारा संसदीय लोकतंत्र को इसका श्रेय दिया।।यह लोकपाल कानून मनमोहनसिंह के कार्यकाल के अन्तर्गत इतिहास मे दर्ज होगा।
क्या होगा इस नए लोकपाल कानून से
समाजसेवी अन्ना हजारे ने कहा कि इस विधेयक से 50 फीसदी तक तो भ्रष्टाचार मिटेगा,देश ने देखा की अन्ना के आन्दोलन के चलते हुए बनी आम आदमी पार्टी को लोगो ने सभी दलों को नकारते हुए भ्रस्टाचार के मुद्दे पर दिए जबरदस्त समर्थन से सत्ता से नहीं हटने की चाहत ने सियासी दलों को अभूतपूर्व एकता का परिचय देते हुए लोकपाल कानून बनाने पर विवश किया . लेकिन अब केजरीवाल टीम के हाथ से पार्टी के गठन का मुख्य मुद्दा ही छीन गया होने से वे अनर्गल प्रलाप में लिप्त लगते हे























