नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एके गांगुली के बेशर्मी और योनाचार के आरोप अब जनता के सामने आ रहे है। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह ने लॉ इंटर्न के उस हलफनामे के बारे में विस्तार से जानकारी दी, जो उसने सुप्रीम कोर्ट की बनाई कमेटी के सामने दिया था। इस हलफनामे में जस्टिस गांगुली पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं।गांगुली ने कथित तौर पर लॉ इंटर्न से कहा था कि वह उससे प्यार करते हैं और उसके बाद लिफ्ट तक उस लड़की का पीछा किया था और उससे आग्रह किया था कि वह होटल के कमरे को छोड़कर न जाए, जहां वे ठहरे हुए थे।
लॉ इंटर्न ने खुलासा किया है कि पूर्व जस्टिस गांगुली ने उसके सामने यौन प्रस्ताव रखा और रूम शेयर करने को कहा। जस्टिस गांगुली ने मुझे बताया कि मेरे लिए अलग रूम की व्यवस्था करना मुमकिन नहीं है। उन्होंने मुझे उनके रूम में रोकने की कोशिस की ।लॉ इंटर्न के मुताबिक उसके विरोध के बावजूद जस्टिस गांगुली ने करीब आने की कोशिश की। उसने बताया कि डिनर के दौरान उन्होंने (गांगुली ने) मेरी पीठ पर हाथ रखा। मैं वहां से चली गई। यह उनके लिए साफ संकेत था कि मुझे उनका बर्ताव पसंद नहीं है। बावजूद इसके उन्होंने मेरी पीठ से हाथ नहीं हटाया?
लॉ इंटर्न ने आरोप लगाया है कि जस्टिस गांगुली मुझे बाहों में भरने के लिए मेरे सामने आ गए। उन्होंने मेरे सिर पर हाथ रखकर कहा कि तुम बहुत खूबसूरत हो। इसके बाद मैं तुरंत अपनी सीट से उठ गई। मैं कुछ कर पाती इससे पहले उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया। उन्होंने कहा कि, मैं तुमसे प्यार करता हूं। जब मैंने वहां से जाने की कोशिश की तो उन्होंने मेरी बांह को चूमा और यह बात फिर दोहराई कि वह उससे प्यार करते हैं और उसके बाद लिफ्ट तक उस लड़की का पीछा किया था और उससे आग्रह किया था कि वह होटल के कमरे को छोड़कर न जाए, जहां वे काम के सिलसिले में ठहरे हुए थे।
युवा इंटर्न ने हलफनामे में कथित तौर पर कहा है, “उन्होंने मुझे होटल में रुकने और रात भर काम करने के लिए कहा था। मैंने मना कर दिया और कहा कि मुझे काम जल्दी खत्म कर अपने पीजी एकोमोडेशन में लौटना है…” लेकिन कथित रूप से जस्टिस गांगुली इसके बाद भी उसे रुके रहने और अपने साथ एक ग्लास वाइन पीने के लिए दबाव डालते रहे…लॉ इंटर्न ने और भी कई बातों का खुलासा कर जस्टिस गांगुली को कटघरे में ला खड़ा किया है।
गौर हो कि लॉ इंटर्न ने पिछले साल 24 दिसंबर के साथ उसके साथ हुए इस कथित घटना के बारे में अबतक पुलिस में शिकायत नहीं की है। महिला प्रशिक्षु वकील के साथ यौन उत्पीड़न के आरोपों में घिरे सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अशोक कुमार गांगुली को पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से बर्खास्त करने की मांग ज़ोर पकड़ती जा रही है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जस्टिस गांगुली को उनके पद से हटाने का औपचारिक अनुरोध राष्ट्रपति से किया है। साथ ही पिछले शुक्रवार को संसद में भी इस मामले की गूंज सुनाई दी और दोनों सदनों में जस्टिस गांगुली को बर्खास्त करने की मांग उठी।जस्टिस गांगुली ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह , भाजपा नेता सुषमा स्वराज और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की जोरदार मांगों के बावजूद पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से हटने से इनकार कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह गांगुली के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सकता, क्योंकि इस कथित घटना के समय वह शीर्ष अदालत से रिटायर हो चुके थे और पूर्व जजों पर कार्रवाई का उसके पास कोई अधिकार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख पर कानून के जानकारों और महिला अधिकारों से संबंधित कार्यकर्ताओं ने हेरत जताई.ऐसे में अब एडिशनल सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह ने ऐसे शर्मनाक आरोपों से घिरे जस्टिस गांगुली को पद से हटाने की प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ करने की केंद्र सरकार से पुरजोर मांग की.






















