नईदिल्ली.कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि यह लोकपाल बिल देश के लिए बेहद जरूरी है और इसे इसी सत्र में पास किया जाएगा।राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस लोकपाल के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और उन्होंने भाजपा तथा अपने सहयोगी दलों सहित सभी राजनीतिक पार्टियों से इसे पारित कराने में सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि मैंने कभी नहीं कहा कि लोकपाल ही सारी समस्याओं का समाधान है, लेकिन यह एक बड़ा जरुरी कदम है, जिसे हमें सभी दलों को मिलकर उठाना चाहिए.उन्होंने कहा कि देश में भ्रष्टाचार बढ़ रहा है और भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकपाल गंभीर हथियार है और यह देश की जरूरत है। उन्होंने कहा की सुचना का अधिकार पहला बड़ा कदम था, करप्शन को मिटाने और भी जरुरी कानून बनाये जा रहे हे.
उधर रालेगान सिद्धि में अनशन पर बेठे अन्ना ने राहुल की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद प्रस्तावित लोकपाल बिल पर खुशी जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री भी लोकपाल के दायरे में हैं, इतना ही नहीं, सरकारी मदद से चलने वाले स्वयंसेवी संगठन भी लोकपाल के दायरे में हैं, सीबीआई भी लोकपाल के दायरे में है, इससे हम संतुष्ट हैं, यह अच्छी शुरुआत है। अन्ना हजारे पांच दिन से अनशन पर बैठे हैं, उन्होंने प्रस्तावित लोकपाल बिल के प्रत्येक बिंदु से किरण बेदी की उपस्थिति में सहमती दर्शायी और इसका स्वागत किया, उनका कहना है कि वह इस लोकपाल बिल के पास होने पर अनशन तोड़ेंगे.
भाजपा ने भी सरकारी लोकपाल बिल पर मंजूरी जता दी है। पार्टी के नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने कहा कि पार्टी सिर्फ इतना चाहती है सेलेक्ट कमेटी के सुझावों की अनदेखी न की जाए। जेटली ने यहां तक कहा कि सरकार अगर सोमवार को बिल पास करना चाहती है तो हम तैयार हैं। उन्होंने कहा कि सदन मे अगर कोई हंगामा करता है तो हम हंगामे के बीच भी बिल पास करने को तैयार हैं।
राहुल प्रेस कांफ्रेंस में पी चिदंबरम, कपिल सिब्बल और अजय माकन जैसे बड़े नेताओं के साथ आए थे। वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि सभी दलों से विचार विमर्श के बाद देश के लिए सबसे सशक्त लोकपाल बिल लाया गया है और यह लोकसभा में पास हो चुका है.कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि लोकपाल सीबीआई का इस्तेमाल कर सकता है और लोकपाल की नियुक्ति में एक अलग कानून बनाकर पूरी पारदर्शिता बरती जाएगी.
घटनाक्रम से लगता हे कि अन्ना, कांग्रेस और बीजेपी आदि सियासी दलों में लोकपाल बिल को लेकर अंदरूनी सहमती बन गयी हे, जिसमें से की टीम केजरीवाल अलग थलग कर दी गयी, प्राप्त जनसमर्थन और गठन का सबसे बड़ा मुद्दा हाथ से निकलने से आम आदमी पार्टी के हाथ से तोते उड़ गए और इससे विचलित हो केजरीवाल कंपनी अब अन्ना के विरुद्ध भी अनर्गल प्रलाप में जुट गए लगते हे.






















