भोपाल। मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह की भाजपा सरकार ने जबरजस्त हैट्रिक लगाई, कांग्रेस चारो खाने चित हो गई, राजनीतिक विश्लेषको की नजर में जनता के “फिर भाजपा फिर शिव राज” में अपना इतना विश्वास जताने के मुख्य कारण क्या रहे
1 राज्य के भ्रष्टाचार से बड़े केंद्र के घोटाले महंगाई: सबसे प्रमुख बात तो यह की पेट्रोल-डीजल खाधान्न सब्जी की महंगाई पर कांग्रेस नेताओ के असम्बेदंनशील बयानों और कार्पोरेट को ही खुश करने वाली मूर्खतापूर्ण आर्थिक नीतियों ने जनता को चिड़ा कर केंद्र और कांग्रेस के बिल्कुल खिलाफ कर दिया,
2 देर से भी नहीं जागे कांग्रेसी हवाई नेता: मध्यप्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस बिल्कुल भी तैयार दिखाई नहीं दी, सारे नेता दिल्ली में ही रहना पसंद करते हे, मप्र ऐसे आते हे जेसे विदेश भ्रमण करने या अपनी प्रजा को दर्शन देकर एहसान करने आये हो, मप्र की जनता को चुनाव के पहले तक यही समझ में नहीं आया कि कांग्रेस कहीं है भी या नहीं, वहीं शिवराज सिंह चौहान ने दो साल पहले से ही लगातार पूरी मेंहनत और गंभीरता से चुनावी तैयारियां शुरू करते हुए जनता को प्रभावित करने वाली योजनाओ का अत्यंत सख्त क्रियान्वन और लगातार प्रचार कराया, आशीर्वाद यात्रा कर बार बार जनता के सामने विकास कार्यों को गिनाना शुरू कर दिया, कांग्रेस अपनी आदत के मुताबिक सरकार की नाकामियों को समय पर न उठाकर सोयी रही ,
3.संगठनविहीन कांग्रेस के अनेक गुट: कांग्रेस शुरुआत से ही कमलनाथ बनाम दिग्विजय बनाम पचोरी बनाम ज्योतिरादित्य बनाम भूरिया में ही उलझा रहा और एक दुसरे को नीचा दिखाने में ही लगा रहा, कांग्रेस के क्षत्रपो ने मुख्यमंत्री बनने की होड़ में अपने कमजोर प्रत्याशियों को टिकिट दिलाये,विरोधी गुट के अच्छे उम्मीदवारों के टिकिट कटवाए और फिर भी यदि कोई योग्य खड़ा हुआ तो उसे हरवाया भी,
4. भाजपा का प्रभावी संगठन: भाजपा के पास कार्यकर्ताओं की संगठित फौज ने घर घर भाजपा हर घर भाजपा अभियान एक वर्ष पहले से चलाया,बीजेपी का नेतृत्व शिवराज सिंह चौहान के हाथों में था। पार्टी के सभी नेता एकजुट थे और कहीं भी गुटबाजी नजर नहीं आई,अपने कार्यो को भरपूर प्रचारित किया,संघ भी लगातार निगरानी सहयोग डेमेज कंट्रोल की भूमिका में रहा,
5.शिवराज फेक्टर के साथ मोदी का बोनस: शिवराज फेक्टर के साथ मोदी का बोनस भी बीजेपी के लिए बड़ी जीत लाया , मोदी चुनाव प्रचार के लिए जहां भी गए, वहां की जमीनी स्थिति का पहले ही बारीक मुआयना किया अपने भाषणों में कांग्रेस राहुल को योजनाबद्ध तरीके से जमकर लताड़ा, जबकि कांग्रेस और राहुल बगेर पूरी तेयारी से सिर्फ उनके सवालों के जवाब ही ढूंढती नजर आई। मोदी के भाषणों में जहां देश के आम जन को छूने वाले मुद्दे थे,वहीं राहुल गांधी के भाषणों में पिटे हुए भावनात्मक परिवारिक मुद्दे रहे जो कि सिर्फ सहानुभूति बटोरने की नाकाम कोशिश करते नजर आए।






















