नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने देश में हाकी के गिरते स्तर को लेकर खासी चिंता जताई है और कहा कि राष्ट्रीय खेल के गिरते स्तर के लिए कोई ठोस उपाय सामने नहीं आए हैं और यह चिंतनीय है। भारत पहले इस खेल में गोल्ड मेडल जीतता था, पर अब नहीं। शीर्ष कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि राजनीति के कारण खेल का स्तर काफी नीचे गिरा है। साथ ही कोर्ट ने यह टिप्पणी भी की कि खेल महासंघों का नेतृत्व कारोबारियों और राजनेताओ के बजाय खिलाड़ियों को करना चाहिए।
लंबे समय से हॉकी के खेल को राजनीति बुरी तरह बर्बाद कर चुकी है। भारतीय हॉकी फेडरेशन (आईएचएफ) और हॉकी इंडिया (एचआई) दोनों पक्ष इस खेल के ऊपर अपने अधिकार का दावा करते लड़ते रहे हैं। हॉकी इंडिया ने दो साल पहले सुप्रीम कोर्ट में दस्तक दी थी और उस मामले में सुनवाई के दौरान गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस खेल को लेकर उक्त टिप्पणी की है।
गौर हो कि खेल मंत्रालय ने बीते दिनों उन आठ राष्ट्रीय खेल महासंघों को नई समय सीमा जारी की है जिन्होंने अभी तक खेल संहिता के अनुरूप अपने संविधान में संशोधन नहीं किया है। मंत्रालय ने इन महासंघों से 31 दिसंबर 2013 तक जरूरी दस्तावेज सौंपने को कहा है, ऐसा नहीं करने पर सरकारी मान्यता ‘प्रभावित’ हो सकती है। अभी तक मान्यता प्राप्त 53 राष्ट्रीय खेल महासंघों में से 45 ने अपने संविधान में उम्र और कार्यकाल संबंधी नियमों के अनुसार संशोधन कर लिया है, जबकि क्रिकेट अपने को खेल मंत्रालय से भी ऊपर मानता आया हे.




















