जेनेवा। स्विट्जरलैंड अब काला धन जमा करने वालों के लिए सुरक्षित ठिकाना नहीं होगा, भारत, अमेरिका समेत अंतरराष्ट्रीय दबाव में स्विस बैंक बेहिसाबी धन जमा कराने वालों पर नकेल कसने के लिए सहमत हो गए हैं। वे न केवल संदिग्ध खाताधारकों से संबंधित सूचनाओं को खुद साझा करने के लिए राजी हुए हैं बल्कि टैक्स चोरी प्रकरण में कार्रवाई के लिए विदेशी सरकारों को प्रशासनिक सहयोग प्रदान करने का भी इन बैंकों ने भरोसा दिलाया है। इतना ही नहीं स्विस बैंक विदेशी ग्राहकों के खातों में जमा होने वाले बेहिसाबी धन पर भी निगरानी बढ़ाएंगे। उन्हें अंतरराष्ट्रीय कर नियमों का पालन करने की सलाह भी देंगे।
इस कारण शिथिल हुई बैंकिंग गोपनीयतादरअसल ओईसीडी का अंग बनने के बाद स्विट्जरलैंड ने अपने कठोर बैंकिंग गोपनीयता कानून को शिथिल करने का फैसला किया है। पेरिस स्थित वैश्विक कर नीति सलाहकार समूह आर्गेनाइजेशन फॉर इकोनामिक कोआपरेशन एंड डेवलपमेंट (ओईसीडी) के भारत सहित 60 देश सदस्य हैं। अब स्विट्जरलैंड के भी ओईसीडी समझौते का हस्ताक्षरकर्ता बन जाने कारण स्विस बैंक में कुछ भी गोपनीय नहीं रह जाएगा। ये बैंक सूचना साझा करने और कार्रवाई में सहयोग प्रदान करने के लिए कानून बाध्य हैं।
ये हैं नए दिशा-निर्देश इस बारे में वहां के 333 बैंकों के आधिकारिक संगठन स्विस बैंकर्स एसोसिएशन (एसबीए) ने हाल ही में दिशा-निर्देश जारी कर अंतरराष्ट्रीय कर नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए कहा है। एसबीए ने स्विस बैंक से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि किसी भी कीमत पर बेहिसाबी धन नहीं जमा होना चाहिए। टैक्स चोरों के स्विस बैंक का ग्राहक बनने पर लगाम कसने के लिए एसबीए ने कई उपाय भी सुझाए हैं ताकि बगैर टैक्स अदा की गई राशि बैंक में न जमा हो पाए। बैंकर्स एसोशिएशन के अनुसार, स्विस बैंक उन परिसंपत्तियों को न जमा करें, जिनके बारे में उन्हें लगे कि इन पर टैक्स नहीं चुकता किया गया है या ये कर दायरे से बाहर रहेंगी।
आगाह किए जाएंगे विदेशी ग्राहक एसबीए ने उन विदेशी ग्राहकों पर नजर रखने के लिए भी कहा है जो कर चोरी के इरादे से अपने खातों को स्विट्जरलैंड के बैंकों में लगातार बदलते रहते हैं। ऐसे ग्राहकों को आगाह किया जाएगा कि वे अपने देश के कर रियायत संबंधी कानूनों का फायदा उठाते हुए अपने खाते का नियमानुसार कर लें। जो ग्राहक बैंक की सलाह नहीं मानेगा, संबंध खत्म करने के पहले उसे आखिरी मौका भी दिया जाएगा कि वह स्विस बैक के कहे मुताबिक कदम उठाए। बैंकर्स एसोसिएशन ने साफ कहा है कि स्विस बैंक यह काम सूचनाओं के स्वत: आदान-प्रदान की नई अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था लागू होने से पहले कर लें।
स्विस बैंक को होगा भारी घाटाएसबीए का अनुमान है कि उसके इस कदम से स्विस बैंक को भारी नुकसान होगा। विदेशी मुद्रा के आगम में हो सकती है कमी। 2012 के अंत में सभी स्विस बैंक में 5.57 ट्रिलियन स्विस फ्रैंक (383 लाख करोड़ रुपये से अधिक) की कुल संपत्ति जमा थी। इसमें से 51 फीसद विदेशी ग्राहकों की परिसंपत्तियां शामिल हैं।
भारत को होगा फायदा स्विट्जरलैंड के ओईसीडी का सदस्य बन जाने और उसके घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करने के कारण काला धन जमा करने वाले भारतीय नागरिकों की पोल खुलने वाली है। इससे टैक्स चोरी के इरादे से स्विस बैंक में जमा कराई गई खरबों की अकूत धनसंपदा तक सरकार की पहुंच हो सकेगी। इस धन को स्वदेश लाने के प्रयास में भी मदद मिल सकेगी।



















